
हिंदू धर्म में ओम का महत्व
‘ओम’ क्या है और क्यों है इसकी इतनी महत्ता?
ज्योतिषाचार्य मुकेश भारद्वजा के अनुसार ईश्वर के नामकरण में जो भी नाम रखे जाते हैं, वे ज्यादातर सिर्फ एक गुण को ही बता पाते हैं। इसलिए अ, उ तथा म् को जोड़कर एक ऐसा शब्द बनाया गया, जिसमें आदि से अंत तक की ध्वनियों का समावेश हो सके। क्योंकि 'अ' सभी स्वरों, व्यंजनों में है और इसका उच्चारण स्थान कंठ है, जो प्रथम उच्चारण स्थान है। वहीं 'म' का उच्चारण स्थान ओष्ठ है जो कि अंतिम उच्चारण स्थान है। 'ओम' में म कहने के साथ मुख बंद हो जाता है। 'उ' कंठ और ओष्ठ के मध्य बोला जाता है।
माथे पर क्यों लगाया जाता है तिलक?
सनातन धर्म में तिलक के बिना कोई भी त्योहार या धार्मिक आयोजन पूर्ण नहीं माना जाता है। क्योंकि यह हिन्दू संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। इसलिए देवी-देवताओं, संत-महात्माओं के मस्तक पर तो हमेशा तिलक सुशोभित रहता है। आम लोग त्योहार, पूजा-पाठ और संस्कारों जैसे अवसरों पर तिलक लगाते हैं। तिलक लगाने से शीतलता और शांति का भी अनुभव होता है।
Updated on:
25 Nov 2023 04:10 pm
Published on:
25 Nov 2023 04:07 pm
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