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क्यों भगवान राम ने विष्णुलोक जाने के लिए हनुमान जी से किया छल?

श्री राम के मृत्यु वरण में सबसे बड़ी बाधा उनके प्रिय भक्त हनुमान थे।

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नई दिल्ली। संसार में आने वाला मनुष्य अपने जन्म से पहले ही अपनी मृत्यु का दिन यम लोक में निश्चित करके आता है। यह कहना सही होगा कि जो आत्मा सांसारिक सुख भोगने के लिए संसार में आई है, वह एक दिन वापस जरूर जाएगी, यानी कि मनुष्य को एक दिन मरना जरूर है। लेकिन इंसान और ईश्वर के बीच में एक बड़ा अंतर है। इसलिए हम भगवान के लिए मरना शब्द कभी प्रयोग नहीं करते, बल्कि इसके स्थान पर उनका इस 'दुनिया से चले जाना' या 'लोप हो जाना', इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हैं।

मनुष्य रूप में जन्म लेने वाले भगवान के अवतारों का भी इस धरती पर एक निश्चित समय निर्धारित था, वो समय समाप्त होने के बाद उन्हें भी अपने प्राण त्याग करके अपने लोक वापस लौटना पड़ा था। उसी प्रकार भगवान श्री राम भी इस लोक को छोड़कर वापस विष्णुलोक गए। श्री राम के मृत्यु वरण में सबसे बड़ी बाधा उनके प्रिय भक्त हनुमान थे। क्योंकि हनुमान के होते हुए यम की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो राम के समीप भी जा सके प्राण लेना तो बहुत दूर की बात है। इस बात का हल स्वयं श्री राम ने निकाला।

क्या किया भगवान श्री राम ने-
अंततः वो समय आ ही गया जब श्री राम जी को देव लोक वापस जाना था संसार के सारे दुख-सुख भोगकर। वह जानते थे कि जो जन्म लेता है उसे मोक्ष पाना ही है। उन्होंने कहा कि 'यम को मेरे पास आने दो। मेरे लिए वैकुंठ, मेरे स्वर्गिक धाम जाने का समय आ गया है।' मृत्यु के देवता यम अयोध्या में प्रवेश करने से डरते थे क्योंकि उनको राम के परम भक्त और उनके महल के मुख्य प्रहरी हनुमान से डर लगता था। अयोध्या में यम के प्रवेश करने समय हनुमान जी का वहां से जाना जरूरी था। इसलिए राम ने अपनी अंगूठी को महल के फर्श के एक छेद में से गिरा दिया और हनुमान से इसे खोजकर लाने के लिए कहा। हनुमान ने स्वंय का स्वरुप छोटा करते हुए बिलकुल भंवरे जैसा रूप ले लिया और केवल उस अंगूठी को ढूढंने के लिए छेद में प्रवेश कर गए।

भगवान श्री राम जी द्वारा बनाया गया वह छेद केवल छेद नहीं था बल्कि एक सुरंग का रास्ता था, जो सांपों के नगर नाग लोक तक जाता था। हनुमान नागों के राजा वासुकी से मिले और अपने आने का कारण बताया। वासुकी हनुमान को नाग लोक के मध्य में ले गए जहां अंगूठियों का पहाड़ जैसा ढेर लगा हुआ था। वासुकी ने कहा 'यहां आपको राम की अंगूठी अवश्य ही मिल जाएगी।' हनुमान सोच में पड़ गए कि वो कैसे उसे ढूंढ पाएंगे क्योंकि ये तो भूसे में सुई ढूंढने जैसा था। लेकिन सौभाग्य से, जो पहली अंगूठी उन्होंने उठाई वो राम की अंगूठी निकली।

वास्तव में वो सारी अंगूठी जो उस ढेर में थीं, सब एक ही जैसी थी। इसका क्या मतलब है? हनुमान जी सोच में पड़ गए। वासुकी मुस्कुराए और बाले, 'जिस संसार में हम रहते है, वो सृष्टि व विनाश के चक्र से होकर निकलती है। इस संसार के प्रत्येक सृष्टि चक्र को एक कल्प कहा जाता है। हर कल्प के चार युग या चार भाग होते हैं। दूसरे भाग या त्रेता युग में, राम अयोध्या में जन्म लेते हैं। वासुकि की बताई बात के अनुसार उन्हें यह समझ आया कि उनका नाग-लोक में आना केवल श्री राम द्वारा उन्हें उनके कर्तव्य से भटकाना था ताकि काल देव अयोध्या में प्रवेश कर सकें और श्री राम को उनके जीवनकाल के समाप्त होने की सूचना दे सकें। अब जब वे अयोध्या वापस लौटेंगे तो श्रीराम नहीं होंगे और श्रीराम नहीं तो दुनिया भी कुछ नहीं है।