
yoga girl
योग को योग शास्त्र बनाने का श्रेय महर्षि पतंजलि को है। पतंजलि ने करीब 22 सौ साल पहले लिखी थी योग सूत्र। योग ज्ञान के बारे में माना जाता है कि यह सबसे पहले ब्रह्मा ने सूर्य को दिया था। सूर्य से नारद और नारद से पृथ्वी पर मनु को यह ज्ञान मिला था। इसके बाद से धीरे-धीरे पृथ्वी पर योग फैला। योग का इतिहास बताते हुए राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के स्वस्थ वृत्ति एंव योग सेंटर के हैड प्रो. कमलेश कुमार शर्मा ने ये जानकारी दी। प्रो. शर्मा कहते हैं कि पतंजलि के योगशास्त्र में योग के आठ आसनों के बारे में विस्तार से बताया गया है। पतंजलि के बाद योग का प्रचलन बढ़ा और संस्थानों, पीठों तथा आश्रमों में योग होने लगा। वहीं 15वीं शताब्दी के आस पास लिखी हठ प्रदीपिका और घेरंड संहिता भी योग की प्रामाणिक पुस्तकें हैं।
देश में पांच हजार साल से हो रहा है योग
भारत में योग का प्रमाण लगभग पांच हजार साल से है। सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े स्थलों में इससे जुड़े कई प्रमाण भी मिले हैं। 1920 ई. में पंजाब और हरियाणा समेत पाकिस्तान के सिंधु प्रांत में हुई खुदाई में योग की परंपरा होने के सबूत मिलते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता को 3300-1700 ई.पू. का माना जाता है।
वेद में है ध्यान और प्राणायाम की चर्चा
जगत गुरु रामानंद राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद मिश्र बताते हैं कि वेद- पुराणों मन को शांत और स्वस्थ रखने के लिए ध्यान और प्राणायाम का वर्णन है। कुछ विद्वान वेदों की उत्पत्ति काल दस हजार वर्ष पूर्व भी मानते हैं। लेकिन स्पष्ट है कि वेद के साथ ही योग की उत्पत्ति हुई थी और गुरु-शिष्य परम्परा के माध्यम से योग ज्ञान एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलता रहा।
Published on:
16 Jun 2016 09:45 am
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