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इस विशेष दिन हुए थे भगवान विष्णु के 3 अवतार, जानें क्या है इसका महत्‍व

इस विशेष दिन हुए थे भगवान विष्णु के 3 अवतार, जानें क्या है इसका महत्‍व

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भोपाल

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Tanvi Sharma

May 04, 2019

bhagwan vishnu ke avtar

अक्षय तृतीया का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन सोना खरीदने व खरीदारी करना का दिन माना जाता है। वहीं पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु के 3 अवतार हुए थे। वैशाख शुक्ल की तृतीया तिथि के दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है और इसे पौराणिक दृष्टि से मंगलकारी भी माना जाता है। अक्षय तृतीया का दिन बहुत से मायनों में शुभ होता है। दान-पुण्य करने वाले व्यक्ति को इस दिन क्षय पुण्य यानी कभी खत्म ना होने वाले पुण्य की प्राप्ति होती है। तो आइए अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु के अवतारों के बारे में जानते हैं...

नर-नारायण अवतार

भगवान विष्‍णु ने 24 अवतार लिए हैं, इन्हीं 24 अवतारों में से चौथा अवतार नर-नारायण का है। पुराणों के अनुसार नर-नारायण की उत्पत्ति धर्म की पत्नी मूर्ति के गर्भ से हुई थी। भगवान विष्णु ने यह जन्म धर्म की स्‍थापना के लिए था। कहा जाता है, बदरीनाथ दो पहाड़ियों के बीच स्थित है। एक पर भगवान नारायण ने तपस्या की थी जबकि दूसरे पर नर ने। नारायण ने द्वापर युग में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया, वहीं नर नें अर्जुन के रुप में अवतार लिया था। नारायण का तप भंग करने के लिए इंद्र ने अपनी सबसे सुंदर अप्सरा रंभा को भेजा था।

हयग्रीव अवतार

भगवान विष्णु का 16वां अवतार है हयग्रीव अवतार। भगवान विष्णु ने यह अवतार धर्म की रक्षा के लिए लिया था। पुराणों के अनुसार एक दिन मधु-कैटभ नाम के दैत्‍य ब्रह्माजी से उनके वेदों को चुराकर रसातल में ले गए थे। बहुत कोशिशों के बाद भी ब्रह्मा जी को वेद नहीं मिले तब ब्रह्माजी परेशान होकर भगवान विष्‍णु की शरण में गए। यही कारण था की भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए हयग्रीव का अवतार लिया। उसके बाद उन्होंने दैत्‍यों का वध करके ब्रह्माजी को उनके वेद सकुशल लौटा दिए।

परशुरामजी अवतार

भगवान विष्‍णु 18वें अवतार बहुत ही प्रमुख अवतार माने जाते हैं। पुराणों में उनकी उ‍त्‍पत्ति को लेकर यह कथा मिलती है। प्राचीनकाल में महिष्‍मती नगरी में सहस्‍त्रबाहु नामक क्षत्रिय शासक का राज था। उसे अपनी शक्तियों पर बहुत घमंड था। एक बार अग्निदेव ने उससे भोजन कराने का आग्रह किया। तब सहस्‍त्रबाहु ने घमंड चूर होकर कहा आप कहीं से भी भोजन प्राप्‍त कर सकते हैं, चारों ओर मेरा ही राज है। अग्निदेव ने जंगलों को जलाना शुरू कर दिया। जंगल में एक कुटिया में ऋषि आपव तपस्‍या कर रहे थे। अग्नि ने उनके आश्रम को भी जला डाला। जब उन्‍होंने सहस्‍त्रबाहु को शाप दिया कि उसका सर्वनाश होगा। भगवान विष्‍णु ने महर्षि जमदग्नि के पांचवें पुत्र के रूप में जन्‍म लिया और यह परशुराम कहलाए। परशुराम ने समस्‍य क्षत्रिय कुल का नाश कर दिया।