धर्म

आषाढ़ नवरात्रि में डोली से आ रहीं माता, जानें नवरात्रि में माता की सवारी का फार्मूला

आषाढ़ नवरात्रि में मां की सवारी डोली है, आइये जानते हैं माता की सवारी का फार्मूला क्या है (mother jagadamba vehicle in Navratri)।

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Feb 27, 2023
ashadha gupt navratri 2025: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 में मां की सवारी का फार्मूला (Photo Credit: Freepik)

Ashadha Gupt Navratri 2025 : इस साल आषाढ़ नवरात्रि 2025 की शुरुआत गुरुवार 26 जून से हो रही है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में मां जगदंबा डोला से धरती पर आएंगी। लेकिन सवाल उठता है कि कैसे पहचानते हैं कि नवरात्रि में मां की सवारी, आइये जानते हैं इसका फार्मूला


नवरात्रि की शरुआत के दिन से तय होती है मां की सवारी

धार्मिक ग्रंथों में इस संबंध में एक श्लोक का उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है कि शशिसूर्ये गजारूढ़ा, शनिभौमे तुरंग मे। गुरौ शुक्रे दोलायां, बुधे नौका प्रकीर्तिता।। इस श्लोक के अनुसार घटस्थापना की तिथि से मां की सवारी और उसके फल का अनुमान लगाया जाता है।


घट स्थापना का दिन


सवारी
रविवार-सोमवारहाथी
शनिवार-मंगलवारघोड़ा
गुरुवार-शुक्रवारडोला
बुधवारनाव

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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 में घटस्थापना बृहस्पतिवार को होगी। इसका अर्थ है मां जगदंबा डोला से धरती पर आएंगी और जिस सवारी से धरती पर आती हैं उसी के अनुसार आगे की घटनाएं होती हैं। इसे भी एक श्लोक में स्पष्टक किया गया है। श्लोक गजे च जलदा देवी, क्षत्रभंग स्तुरंगमे, नौकायां सर्वसिद्धि स्या ढालायां मरणंधुवम् में इसे स्पष्ट किया गया है।

आइये जानते हैं मां की सवारी का फल

सवारीफल
हाथीअधिक वर्षा, सुख
घोड़ापड़ोसी देशों से युद्ध की आशंका
नौकामनोकामना पूर्ति
डोलीमहामारी का भय

कब से शुरू हो रही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 इस साल 26 जून से शुरू हो रही है। इसकी घटस्थापना का समय सुबह 5.35 बजे से सुबह 7.07 बजे तक है। इसके अलावा दोपहर 12.02 बजे से 12.57 बजे तक अभिजित मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है। इस दिन पहली महाविद्या काली की पूजा भी की जाएगी।

अशुभ समय में न करें घटस्थापना

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में भी वही अनुष्ठान किए जाते हैं, जो दूसरी नवरात्रि के समय। लेकिन किसी भी स्थिति में कलश स्थापना शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए।

मान्यता है कि अशुभ समय में घटस्थापना करने से देवी शक्ति का प्रकोप हो सकता है। इसके लिए अमावस्या और रात्रिकाल में घटस्थापना करना निषिद्ध है। वहीं प्रतिपदा तिथि के दिन का पहला एक तिहायी भाग घटस्थापना के लिए सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। यदि किसी कारणवश यह समय उपलब्ध न हो तो अभिजित मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है।

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