
Sawan Month 2022: लगभग डेढ़ हजार फीट ऊंचे इस शिव मंदिर की है बड़ी मान्यता, जानिए क्यों पांडवों से माना जाता है इसका संबंध
झारखंड के चतरा जिले में कौलेश्वरी या कोलुआ पर्वत पर स्थित माता कौलेश्वरी मंदिर हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों के संगम का प्रतीक माना जाता है। जमीन से 1575 फीट की ऊंचाई पर कौलुआ पर्वत पर स्थित मां कौलेश्वरी देवी का मंदिर पर्यटन और धार्मिक दोनों दृष्टि से महत्व रखता है। कहा जाता है कि हर साल यहां दर्शन के लिए दुनिया भर से काफी संख्या में पर्यटक आते हैं। माता कौलेश्वरी के दर्शनों के साथ ही यह मंदिर शिव भक्तों के लिए भी बेहद खास है। मान्यता है कि महाभारत काल से ही यहां पर्वत की चोटी पर शिव मंदिर स्थित है। तो आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़ी अन्य मान्यताएं...
पांडवों से माना जाता है इस मंदिर का संबंध
पौराणिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इसी मंदिर में भगवान शिव की आराधना की थी। भगवान शिव की आराधना के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर में हर सोमवार को भक्तजन भजन कीर्तन में तल्लीन रहते हैं।
कहा जाता है कि चतरा के कौलेश्वरी पर्वत पर एक सरोवर स्थित है और भक्तजन भोलेनाथ के अभिषेक के लिए यहीं से जल लेते हैं। वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार अपने वनवास काल के दौरान भगवान श्री राम के साथ माता सीता और भ्राता लक्ष्मण ने यहां समय बिताया था।
कोलुआ पर्वत पर स्थित भोलेनाथ के इस मंदिर में श्रद्धालुओं को बाहर से कुछ भी लाने की मनाही है क्योंकि पूजा की सामग्री मंदिर के आस-पास ही उपलब्ध हो जाती है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)
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Published on:
18 Jul 2022 04:56 pm
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