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Makar Sankranti 2026: सूर्य का हुआ मकर राशि में प्रवेश, इतने बजे तक रहेगा पुण्यकाल

मकर संक्रांति 2026 सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि सूर्य के उत्तरायण होने, शनि-सूर्य योग और षटतिला एकादशी के कारण एक विशेष आध्यात्मिक अवसर है। सही समय पर पूजा, दान और संयम से यह पर्व जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

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Makar Sankranti 2026 (PC:GEMINI GENERATED)

Makar Sankranti 2026 (PC:GEMINI GENERATED)

मकर संक्रांति का पर्व हर साल सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस बार मकर संक्रांति कई विशेष शुभ संयोग लेकर आ रही है। सूर्य का उत्तरायण होना, शनि की राशि मकर में सूर्य का प्रवेश और षटतिला एकादशी का संयोग इस पर्व को और भी पवित्र बना रहा है। यही वजह है कि ज्योतिष शास्त्र में इस बार की मकर संक्रांति को बेहद खास माना जा रहा है।

संक्रांति क्या होती है और मकर संक्रांति क्यों है महत्वपूर्ण?

जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे संक्रांति कहा जाता है। साल में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं, लेकिन मकर और कर्क संक्रांति को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। उत्तरायण काल को देवताओं का समय माना जाता है, जिसमें किया गया दान, जप और तप कई गुना फल देता है।

कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति 2026?

इस बार सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि सूर्य का गोचर सूर्यास्त से पहले हो रहा है, इसलिए 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है। इस दिन पुण्य काल दोपहर 3:13 से शाम 5:44 बजे तक रहेगा, जिसमें स्नान, दान और पूजा करना अत्यंत शुभ होगा।

यह भी पढ़ें: Makar Sankranti 2026: स्नान, दान और पूजा का सही समय, जानें पूरे नियम

सूर्य और शनि का विशेष योग क्यों माना जाता है?

मकर राशि शनि की राशि है और सूर्य देव शनि के पिता माने जाते हैं। ऐसे में मकर संक्रांति पर पिता-पुत्र का मिलन माना जाता है। सूर्य दिन के स्वामी हैं और शनि रात के, इसलिए इस दिन दिवा और रात्रि सत्ता का संतुलन बनता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को ज्योतिष और आध्यात्म दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

षटतिला एकादशी का संयोग क्यों है खास?

इस बार मकर संक्रांति के दिन ही षटतिला एकादशी भी पड़ रही है। इस एकादशी में तिल का छह प्रकार से प्रयोग करने का विधान है। तिल का दान, तिल से स्नान और तिल से बने भोजन का सेवन करना विशेष पुण्यदायक माना जाता है। यही वजह है कि इस बार तिल और गुड़ का दान अत्यंत शुभ फल देने वाला माना जा रहा है।

सूर्य के मकर गोचर का राशियों पर प्रभाव

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश अगले एक महीने तक सभी 12 राशियों के जीवन पर असर डालेगा। कुछ राशियों के लिए यह समय करियर और धन के लिहाज से लाभकारी रहेगा, जबकि कुछ राशियों को स्वास्थ्य और निर्णयों में सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष के अनुसार, मकर संक्रांति पर राशि के अनुसार किया गया दान जीवन की परेशानियों को कम कर सकता है।