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Chaitra Maas 2026: चैत्र मास में सूर्य देव को अर्घ्य देने के चमत्कारी फायदे, जानकर रह जाएंगे हैरान

Chaitra Maas 2026: चैत्र मास का महीना न केवल नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि नई ऊर्जा, नई उम्मीदों और सकारात्मक बदलावों का भी समय माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाए तो जीवन में कई प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं।

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भारत

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MEGHA ROY

Mar 11, 2026

Surya Dev Jal Arpan, Chaitra Month Hindu Rituals, Chaitra Maas Religious Significance

Importance of Surya Puja|फोटो सोर्स- Freepik

Chaitra Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास को बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने सूर्य देव की विशेष पूजा और उन्हें जल अर्पित करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य देने से स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सफलता से जुड़े कई लाभ मिल सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र में भी चैत्र मास में सूर्य उपासना को विशेष फलदायी बताया गया है, इसलिए इस दौरान सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Surya Dev Puja: चैत्र माह में सूर्यदेव की पूजा करने के फयदे

सूर्य देव को समस्त ग्रहों का राजा कहा जाता है। वे ऊर्जा, आत्मबल, तेज और स्वास्थ्य के प्रतीक हैं। इसलिए चैत्र मास में नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देना व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास बढ़ाने, सम्मान दिलाने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र मास में सूर्य देव की नियमित पूजा करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है। कई लोग यह भी मानते हैं कि इससे नौकरी और व्यापार में तरक्की के रास्ते खुलते हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

चैत्र माह में सूर्यदेव की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

  • जल
  • लाल पुष्प
  • अक्षत (चावल)
  • रोली या लाल चंदन
  • धूप और दीप
  • नैवेद्य
  • लाल वस्त्र
  • तांबे का पात्र

चैत्र माह में सूर्यदेव की पूजा करने के नियम

  • रविवार के दिन सूर्य देव का व्रत रखने की परंपरा है। इस दिन कई श्रद्धालु फलाहार करके व्रत रखते हैं।
  • पूजा करते समय पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह रंग सूर्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
  • सूर्य देव को अर्घ्य देते समय जल में थोड़ा सा दूध मिलाने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे पूजा का फल और अधिक शुभ होता है।
  • अर्घ्य देते समय पीले या लाल रंग के फूल अर्पित करना भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

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