
lalita devi jayanti
ललिता देवी की पूजाः धार्मिक कथाओं के अनुसार कामदेव के शरीर की राख से भांडा नाम के राक्षस का जन्म हुआ था। इसके वध और अत्याचारों की समाप्ति के लिए माता शक्ति ने ललिता अवतार लिया था। ललिता जयंती के दिन मां की षोडशोचार पूजा की जाती है। इस दिन स्कंदमाता स्वरूप और भगवान शिव की भी पूजा की जाती है।
माता को प्रसन्न करने के लिए इस दिन ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुदरीयै नमः मंत्र का जाप किया जाता है।
शाक्त समुदाय के अनुसार देवी ललिता को चंडी का स्थान प्राप्त है। इनकी पूजा चंडी पूजा के समान करनी चाहिए और ललिता जयंती पर व्रत रखना चाहिए। मां की पूजा के साथ ललितोपाख्यान, ललिता सहस्त्रनाम, ललिता त्रिशती का पाठ किया जाता है।
शक्तिपीठः माता त्रिपुरसुंदरी का शक्ति पीठ त्रिपुरा में है। मान्यता है यहां माता के वस्त्र गिरे थे, त्रिपुर सुंदरी का शक्ति पीठ भारत के 51 ज्ञात पीठ और 101 अज्ञात शक्ति पीठ में से एक है। दक्षिण त्रिपुरा उदयपुर शहर से तीन किलोमीटर की दूरी पर राधा किशोर गांव में राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी का भव्य मंदिर है। यहां के सती के दक्षिण पाद का निपात माना जाताहै। इस पीठ को कूर्भ पीठ भी कहते हैं।
त्रिपुर सुंदरीः देवी ललिता को त्रिपुर सुंदरी भी कहते हैं। ये षोडशी माहेश्वरी शक्ति की विग्रह वाली शक्ति हैं। इनकी चार भुजा, तीन नेत्र हैं। ये सोलह कलाओं से पूर्ण हैं। इसीलिए ये षोडशी भी कही जाती हैं।
देवी का वर्णनः जानकारों के अनुसार ललिता देवी का वर्णन देवी पुराण में मिलता है। इसके मुताबिक भगवान शंकर को हृदय में धारण करने पर सती नैमिष में लिंगधारिणी नाम से विख्यात हुईं। बाद में इन्हें ललिता देवी के नाम से जाना जाने लगा।
इसके अलावा एक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु के चक्र से पाताल का अस्तित्व खतरे में पड़ गया। इसका असर पृथ्वी पर भी पड़ने लगा, पृथ्वी जलमग्न होने लगी। इससे ऋषि मुनि घबरा गए और आदिशक्ति के इस स्वरूप की उपासना शुरू की। इससे प्रसन्न होकर देवी प्रकट हुईं और चक्र को थाम लेती हैं। इसके कारण सृष्टि नष्ट होने से बच गई। इस तरह ललिता देवी के कारण सृष्टि नष्ट होने से बच गई।
Updated on:
04 Feb 2023 03:44 pm
Published on:
04 Feb 2023 03:37 pm
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