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हैजा पीडि़त मरीजों को बीच रास्ते में उतार गई एम्बुलेंस, महिला ने दमतोड़ा, दो को पुलिस ने भिजवाया अस्पताल

त्योंथर ब्लाक के दत्तुपुर गांव की घटना, दहशत में लोग

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Ambulance dropped cholera patients midway, woman died, police sent two

रीवा। लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत उस समय सामने आ गई जब हैजा पीॢड़त तीन मरीजों को एम्बुलेंस बीच रास्ते में उतारकर चली गई।

सुबह अस्पताल लेकर आए थे परिजन
इस दौरान एक महिला की मौत हो गई। सड़क के किनारे पड़े मरीजों को पुलिस व स्थानीय लोगों ने उनको उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया। घटना त्योंथर तहसील के दत्तुपुर गांव की है। यहां पर पिछले कुछ दिनों से हैजा फैला हुआ है जिसकी वजह से गांव के कई लोग बीमार है। एक परिवार के तीन लोगों की मंगलवार की तड़के तबियत खराब हो गई थी। परिजन तीनों लोगों को उपचार के लिए गढ़ी अस्पताल लेकर आए लेकिन वहां पर कोई जिम्मेदार डाक्टर नहीं था। मौजूद स्टाफ ने उनको त्योंथर अस्पताल के लिए रेफर किया और 108 एम्बुलेंस को बुलवाया। तीनों को लेकर एम्बुलेंस अस्पताल से निकली और बाद में गढ़ी मोड़ के समीप उतारकर चली गई।

रास्ते में महिला की हो गई मौत
तीनों मरीजों को लेकर सड़क के किनारे परिजन बैठे हुए थे जिससे कुछ देर बाद ही सरोज मुसहर 21 वर्ष निवासी दत्तुपुर थाना जनेह की मौत हो गई। दो मरीज सड़क के किनारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी जिस पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। प्राइवेट वाहनों से दोनों मरीजों को अस्पताल भिजवाया गया। इस घटना ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की पोल खोलकर रख दी।

कई दिनों से फैला है हैजा, परिवार में 12 घंटे के भीतर दूसरी मौत
दत्तुपुर गांव में पिछले कई दिनों से हैजा बीमारी का कहर लोगों पर टूट रहा है। यहां पर बीमारी से कई लोग ग्रसित है और अभी तक लोगों तक उपचार नहीं पहुंचा है जिससे लोग बीमारी से ग्रसित होकर काल के गाल में समा रहे है। पीडि़त परिवार में सोमवार की शाम भी वृद्ध की मौत हुई है। सोमवार की शाम ससुर की मौत के बाद मंगलवार की सुबह महिला ने भी दमतोड़ दिया। घटना से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

बांस में कपड़ा बांधकर गठरी की तरह शव लेकर गए परिजन
इस घटना का शिकार हुए परिजनों की बदकिस्मती ने हादसे के बाद भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। जिस स्थान पर यह घटना हुई वहां से शव को घर तक ले जाने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं हुई। बेबस परिजनों ने बांस में कपड़ा बांधा और गठरी में शव को कंधे में रखकर करीब एक किमी पैदल चले। रास्ते में कीचड़ और फिसलने से जूझते हुए किसी तरह परिजन शव घर तक पहुंचे।

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