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रीवा. शासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुरूप एरियर का भुगतान तो अप्रैल में ही हो जाना चाहिए था लेकिन भुगतान की बात छोडि़ए अभी तक सेवा पुस्तिका की जांच तक नहीं हो सकी है। पहले संकुल प्राचार्यों की लापरवाही और अब जिला पंचायत में चल रही हीलाहवाली ने अध्यापकों को पसीना छुड़ा दिया है।
छठवें वेतनमान के एरियर भुगतान को लेकर एक ओर जहां अध्यापक परेशान हैं। वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने हुए हैं। जिले के करीब 5500 अध्यापकों को एरियर का भुगतान होना है। लेकिन कुछ को छोड़ दिय जाए तो ज्यादातर अध्यापकों को अभी तक उनका एरियर नसीब नहीं हुआ है। इतना ही नहीं आधे से अधिक अध्यापकों की सेवा पुस्तिका की जांच ही नहीं हो सकी है।
अध्यापकों की माने तो पहले संकुल प्राचार्यों की ओर से लापरवाही की गई। एरियर भुगतान की निर्धारित डेडलाइन अप्रैल के बीच जाने के बाद जब अध्यापकों में आक्रोश फूटा और शिकवे शिकायत का दौर शुरू हुआ तो सेवापुस्तिका जिला पंचायत कार्यालय पहुंचाई गई। लेकिन आधे से अधिक अध्यापकों की सेवापुस्तिका अभी भी संकुल प्राचार्यों के पास है। संकुल प्राचार्यों का कहना है कि जिला पंचायत में सेवापुस्तिका अधिक हो गई है का हवाला देकर लौटा दिया जा रहा है।
केवल सेटिंग वालों का हो रहा काम
अध्यापकों का कहना है कि जो सेवापुस्तिका जिला पंचायत कार्यालय पहुंची भी है, वह डंप होकर रह गई है। केवल उन्हीं अध्यापकों की सेवापुस्तिका खुल रही है, जिनके द्वारा सेटिंग की जा रही है। अध्यापक व संकुल प्राचार्य के बीच बातचीत का ऑडियो वायरल होने से जहां इस बात का खुलासा हुआ है। हैरत की बात यह है कि इसके बाद भी हालात पहले जैसा ही बना हुआ है।
लेखाधिकारी को जांच
एरियर के भुगतान से पहले अध्यापकों के सेवापुस्तिका की जांच किए जाने का प्रावधान रखा गया है। सेवापुस्तिका के जांच की जिम्मेदारी जिला पंचायत कार्यालय के लेखाधिकारी को दी गई है। इस कार्य में शिक्षा विभाग के भी कई कर्मचारी लगाए गए हैं। अध्यापकों के साथ सेटिंग व दक्षिणा का मामला उन्हीं से संबंधित बताया जा रहा है।
Published on:
02 Jul 2018 07:59 pm

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