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अतिक्रमण: ग्रीन बेल्ट को रौंदते हुए नदी तक पहुंचा अवैध निर्माण

मंत्री ने ग्रीन बेल्ट में अनुमति नहीं देने का दिया है निर्देश, पूरे ग्रीन बेल्ट में है अतिक्रमण

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Suresh Kumar Mishra

Aug 30, 2016

illegal construction

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रीवा।
शहर में आई बाढ़ ने भू-माफिया के इशारे पर कराए जा रहे निर्माण कार्यों की मौन स्वीकृति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। बीते कुछ वर्षों के अंतराल में इतना तेजी के साथ नदियों के किनारे भवन बनाए गए हैं कि मास्टर प्लान में जो क्षेत्र ग्रीन बेल्ट के लिए आरक्षित किया गया था उस पर कब्जा करते हुए इमारतें तान दी गई हैं। ऐसा भी नहीं कि यह निर्माण किसी एक रात में हुए हों।


नदी के किनारे भूमि पर धड़ाधड़ पट्टे होते रहे और निगम निर्माण की अनुमति भी देता रहा। जिनमें पेंच फंसाया तो उन्होंने बिना पूछे ही निर्माण करा डाला लेकिन रोकने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई। वर्ष 1997 में शहर में भीषण बाढ़ आई, करोड़ों का नुकसान हुए तो कई वर्ष तक स्थाई निर्माण लोगों ने नहीं किया लेकिन धीरे-धीरे सब भूलते गए और निर्माण बढ़ता गया।

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यह निर्माण इतना तेजी से हुआ कि ग्रीन बेल्टकहां गायब हो गया किसी को पता ही नहीं चला। बीहर और बिछिया नदियों तक निर्माण पहुंच चुका है, जो नदी के तेज बहाव को रोक रहा है।


निर्माण को तोडऩे की मांग

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बाढ़ के बाद इस अवैध निर्माण को तोडऩे की मांग तेजी से बढ़ रही है। निगम के कुछ अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। जिन्होंने अपने करीबियों को मास्टर प्लान के नियमों को दरकिनार करते हुए निर्माण की अनुमति दिलवाई है। नदियों के किनारे अतिक्रमण को हटाने में प्रशासन के पसीने छूट जाएंगे यहां पर साधारण कार्रवाई में भी राजनीतिक हस्ताक्षेप होता है।


शहरी क्षेत्र में 50 मीटर का ग्रीन बेल्ट

मध्यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 में नदियों एवं तालाब के किनारे से 30 मीटर की दूरी तक निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। रीवा शहर में यह नियम लागू नहीं है क्योंकि यहां पर मास्टर प्लान के तहत निर्माण होता है। जिसमें शर्त रखी गई है कि 50 मीटर नदी का ग्रीन बेल्ट होगा। इतना ही नहीं बाढ़ के दौरान नदी का अधिकतम जल स्तर जहां तक पहुंचा है उस क्षेत्र तक के निर्माण में बाढ़ के खतरे को ध्यान में रखकर निर्माण की अनुमति देनी होगी।


मिट्टी बहाकर पाट किया चौड़ा

बाढ़ की वजह से नदियों में पानी काफी अधिक मात्रा में आया था। किनारे की भूमि पर हुए निर्माण के कारण पूर्वकी बाढ़ से अधिक इस बार मिट्टी का कटाव हुआ है। जिसके चलते नदी का पाट कईस्थानों पर और बढ़ गया है। बिछिया की अपेक्षा बीहर नदी में मिट्टी का कटाव अधिक हुआ है, किनारे के पेड़ भी बह गए हैं।


ईको पार्क के टापू को नुकसान

खासतौर पर निर्माणाधीन ईको पार्क के टापू को अधिक नुकसान पहुंचा है। इसके चारों ओर की मिट्टी 15 से 20 फिट तक बह गईहै। इस बहाव ने यह संकेत दिया हैकि यदि आगे निर्माण हुआ तो बाढ़ के दौरान बड़ा हादसा भी हो सकता है।


मंत्री ने अतिक्रमण पर साधी चुप्पी

बाढ़ के बाद लोगों के बीच पहुंचे मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के सामने जब अवैध निर्माण को हटाने की मांग लोगों ने रखी तो उन्होंने कहा कि नदी के किनारे 30 मीटर के क्षेत्रमें कोई निर्माण नहीं होगा। अब तक बने भवनों के बारे में जब लोगों ने सवाल किया तो इतना कहते हुए पल्ला झाड़ गए कि उसे भी दिखवाएंगे।


दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना

अब विपक्षी दलों द्वारा आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि नदियों के किनारे जगह बची कहां है कि मंत्री उस पर रोक लगाएंगे। बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे सीएम ने भी घोषणा की हैकि नदियों के किनारे हर बार बाढ़ से लोग प्रभावित होते हैं, इस कारण इन बस्तियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है।

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