नदी के किनारे भूमि पर धड़ाधड़ पट्टे होते रहे और निगम निर्माण की अनुमति भी देता रहा। जिनमें पेंच फंसाया तो उन्होंने बिना पूछे ही निर्माण करा डाला लेकिन रोकने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई। वर्ष 1997 में शहर में भीषण बाढ़ आई, करोड़ों का नुकसान हुए तो कई वर्ष तक स्थाई निर्माण लोगों ने नहीं किया लेकिन धीरे-धीरे सब भूलते गए और निर्माण बढ़ता गया।