
In case of settlement of colony on the land of the Corporation Rewa
रीवा। शहर के विकास के लिए अधिग्रहित की गई भूमि पर बिना अनुमति रजिस्ट्री और किसी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी पूरी कालोनियां बस गई। नगर निगम प्रशासन भी इस मामले में उदासीन रहा, क्योंकि पूर्व के अफसरों की सहमति पर ही मनमानी रूप से खाली स्थान पर बाजार और मोहल्ला बसता गया। नगर सुधार न्यास अधिनियम 1960 के तहत समान हल्का में 91.37 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था।
छह मार्च 1992 को नोटिफिकेशन के जरिए स्कीम नंबर छह के लिए आरक्षित कर दिया गया था। इसके कुछ साल तक रजिस्ट्री प्रतिबंधित रही लेकिन बाद में धीरे-धीरे कर भूमि स्वामियों ने बिक्री करना भी शुरू कर दिया। नगर सुधार न्यास बोर्ड समाप्त कर नगर निगम में समाहित किया गया, तब से मनमानी और बढ़ गई।
शिकायतें हुई तो वर्ष 1998 में कलेक्टर ने 50 से अधिक रजिस्ट्रियां निरस्त कर दी। इसके कुछ साल बाद तक फिर से मामला शांत रहा लेकिन बाद में नगर निगम के इंजीनियरों ने मकान बनाने वालों को रोकने के बजाय संरक्षण देना शुरू कर दिया। हालात ऐसे हुए कि अब स्कीम नंबर छह में खाली स्थान ही ढूढ़े नहीं मिल रहा है। इसमें निगम की निर्माण शाखा में पदस्थ रहे अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। इधर सैकड़ों की संख्या में मकान बन गए हैं।
- इंजीनियरों ने निर्माण की अनुमति भी दे दी
स्कीम नंबर छह के लिए भूमि इसलिए अधिग्रहित की गई थी कि व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाएगा। इसके लिए व्यवसायिक और आवासीय दोनों तरह के भवनों का निर्माण कराने का प्रस्ताव था। इधर प्राइवेट लोगों को मकान बनाने की नगर निगम ने अनुमति भी दे दी। करीब आधा सैकड़ा से अधिक बड़े निर्माण किए गए हैं, जिसमें व्यवसायिक भवनों के साथ ही बड़े आवासीय मकान भी शामिल हैं। नोटिफिकेशन के समय कहा गया था कि किसी तरह का निर्माण नहीं किया जाएगा। करोड़ों की भूमि पर प्राइवेट लोगों का मकान बनवाने से निगम के राजस्व को बड़ा नुकसान हुआ है। अब इसकी जांच भी शुरू कर दी गई है।
- पेट्रोल पंप के लिए भूमि का आवंटन निरस्त
नगर निगम आयुक्त ने पेट्रोल पंप के लिए भारतीय पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड जबलपुर के क्षेत्रीय मैनेजर अभिषेक गौड़ के आवेदन पर जांच कराई तो पता चला कि समान के हल्का पटवारी ने मनमानी रूप से जांच प्रतिवेदन भेज दिया है। उक्त प्रतिवेदन में कहा गया है कि ०.३७ एकड़ की जिस भूमि पर पेट्रोलपंप लगाया जाना है, वहां पर नगर निगम की कोई भी योजना प्रस्तावित नहीं है। जिस स्थान पर पेट्रोल पंप लगाने के लिए अनुमति देने के लिए पटवारी ने प्रतिवेदन भेजा था, वह बगीचे के लिए आरक्षित भूमि है। शर्त है कि बगीचे में किसी तरह का निर्माण नहीं किया जाएगा। निगम आयुक्त ने एसडीएम को पत्र लिखकर कहा है कि पटवारी का प्रतिवेदन शून्य किया जाता है। साथ ही बीते २१ जून को जारी किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र की भी निरस्तगी की जाए।
- भवन निर्माण की अनुमति पर उपयंत्री निलंबित
स्कीम नंबर छह में मकान बनाने की अनुमति देने के मामले में नगर निगम आयुक्त ने उपयंत्री अंबरीश सिंह को निलंबित कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि जगन्नाथ गुप्ता को खसरा नंबर ४२७ में भवन निर्माण कराने की अनुमति दी गई थी। उक्त भूमि योजना क्रमांक छह की अधिग्रहित भूमि है, इसके बावजूद निजी व्यक्ति को मकान बनाने के लिए अनुमति दी गई। इस कार्य को पदीय दायित्वों एवं कार्य के प्रति लापरवाही माना गया है। जिसके चलते उपयंत्री अंबरीश सिंह को निलंबित कर मुख्यालय जोन क्रमांक दो में निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि निर्माण शाखा के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एवं एसडीओ की भूमिका भी संदिग्ध है। जिसकी वजह से उनके विरुद्ध भी जांच बैठाई जाएगी। संबंधित अधिकारियों को भी नोटिस देने की तैयारी की जा रही है।
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स्कीम नंबर छह में व्यवस्थित रूप से विकास करने के लिए भूमि अधिग्रहित की गई थी। इसकी जांच की जा रही है, कुछ जगह मनमानी रूप से निर्माण की अनुमति भी दी गई थी, इसलिए संबंधित उपयंत्री को निलंबित कर दिया है। उन सभी अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने निगम को बड़ी आर्थिक क्षति पहुंचाई है। सभी निर्माणों की नए सिरे से जांच शुरू कराई जा रही है।
सभाजीत यादव, आयुक्त नगर निगम
Published on:
24 Jul 2019 11:25 am
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