
रीवा. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना में लाखों के घोटाले में नया मोड़ आ गया है। संभागायुक्त कार्यालय से इसकी जांच रिपोर्ट से जुड़े दस्तावेज गायब हो गए हैं। हाल ही में इसकी जानकारी संभागायुक्त ने राज्य सूचना आयोग को दी है, जिसके बाद से बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि जिस अनियमितता में बड़े अफसरों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है उसकी फाइल कैसे गायब हो गई।
आरटीआई के तहत मांगी थी जानकारी
आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने 2007-08 में स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना में आर्थिक अनियमितता के संबंध में 8 अक्टूबर 2008 को सामान्य प्रशासन विभाग को जांच प्रतिवेदन भेजे जाने की छाया प्रति मांगी थी। साथ ही घोटाले से जुड़े शासन के पत्राचार की प्रतियां भी मांगी थी। संभागायुक्त कार्यालय से जानकारी नहीं दिए जाने के चलते उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील की थी। जहां संभागायुक्त एसके पॉल द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना की जांच से जुड़ा प्रतिवेदन कार्यालय में उपलब्ध नहीं है, साथ ही इस संबंध में हुए पत्राचार की भी जानकारी कार्यालय में नहीं है।
जांच की उठाएंगे मांग
आरटीआई एक्टिविष्ट अजय दुबे ने कहा है कि पूर्व से उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं जिसमें कहा गया है कि संभागायुक्त कार्यालय ने शासन को जांच प्रतिवेदन भेजा था। अब संभागायुक्त द्वारा यह कहा जाना कि जांच प्रतिवेदन नहीं है, अपने आप में सवालिया निशान है। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
दो हजार रुपए का हर्जाना दिया
समय पर आरटीआई अधिनियम के तहत जानकारी नहीं दिए जाने और आयोग के बुलावे पर भी उपस्थित नहीं होने पर दो हजार रुपए का हर्जाना लगाया गया था। जिसे संभागायुक्त की ओर से आवेदक को अदा कर दिया गया है। बीते महीने राज्य सूचना आयुक्त हीरालाल त्रिवेदी ने आदेश में कहा था कि सूचना का अधिकार अधिनियम 19(8)(ख) के तहत दी गई नोटिस पर कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस कारण दो हजार रुपए का हर्जाना लगाया जा रहा है। यह राशि अंतिम क्षतिपूर्ति में समाहित होगी।
तत्कालीन अधिकारी से मांगा शपथ पत्र
राज्य सूचना आयोग ने आवेदक की आपत्ति पर कहा कि 2008 में संभागायुक्त कार्यालय के तत्कालीन शाखा प्रभारी शपथ पत्र देकर बताएं कि स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं थे। साथ ही संभागायुक्त कार्यालय द्वारा 8 अक्टूबर 2008 को कोई जांच प्रतिवेदन भी सामान्य प्रशासन विभाग को नहीं भेजा गया।
अनुपस्थिति को बताया जानकारी नहीं देने का कारण
संभागायुक्त द्वारा सूचना आयोग को दिए गए जवाब में कहा गया है कि आवेदक को कई पत्रों और दूरभाष पर सूचित किया गया था लेकिन वह समय पर नहीं पहुंचे, इस वजह से जानकारी नहीं दी जा सकी। उधर आयोग ने लगातार संभागायुक्त को नोटिस दी लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। जिस पर बीते 9 नवंबर को पेशी के दौरान कहा कि जानकारी प्रस्तुत नहीं करने पर 25 हजार रुपए की शास्ति अधिरोपित की जाएगी और सक्षम अधिकारी को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए अनुशंसा की जाएगी।
यह है पूरा मामला
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत रीवा जिले में युवाओं को प्रशिक्षण देने के नाम पर 42 लाख रुपए अग्रणी सामाजिक संस्था के नाम के एनजीओ को भुगतान किया गया था। अनियमितता के लगे आरोपों के चलते 2008 में विधायक गिरीश गौतम ने विधानसभा में सवाल उठाया था कि प्रशिक्षण नहीं हुए और लाखों रुपए का भुगतान भी कर दिया गया है। सदन को जानकारी देने के लिए तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ निशांत बरबड़े (आईएएस) दस्तावेज लेकर भोपाल गए थे। लौटने पर चोरहटा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि फाइल ट्रेन में चोरी हो गई है। कुछ दिनों तक मामला थाने और जीआरपी के कार्यक्षेत्र को लेकर भटकता रहा और खात्मा लगा दिया गया। मामले की जांच संभागायुक्त द्वारा कराए जाने के बाद 8 अक्टूबर 2008 को प्रतिवेदन सामान्य प्रशासन विभाग के पास भेजे जाने की बात कही जा रही है।

Published on:
25 Dec 2017 02:57 pm

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