
Locust swarm reached near Rewa, alerting farmers
रीवा. टिड्डियों का झुंड रीवा जिले की सीमा तक पहुंच गया है। सोमवार को सुबह यह पन्ना के रास्ते सतना में पहुंचा। नागौद की ओर से एक झुंड अमरपाटन के नजदीक सिरगो पहाड़ का चक्कर लगाने के बाद बहेरा गांव में कुछ देर तक रुका। यहां से भगाने के बाद रामपुर बघेलान के कृष्णगढ़ की तरफ चला गया। वहां से भगाने के बाद बेला की ओर मुड़ा और सायं कई गांवों से होते हुए गोविंदगढ़ और अमरपाटन के नजदीक पहुंचा। कृषि विभाग के उपसंचालक यूसी बागरी ने बताया कि सभी किसानों से कहा गया है कि उनके गांव में यदि पहुंचे तो शोर मचाने का इंतजाम करें। ट्रेक्टर तेजी से स्टार्ट करें, पटाखे फोड़ें एवं अन्य तरह से शोर मचाने का इंतजाम करें। बताया गया है कि सायं अमरपाटन और गोविंदगढ़ के मध्य धतुरहा गांव में यह पहुंचा। रात्रि के समय ये स्थिर हो जाते हैं इसलिए सुबह यहां से गोविंदगढ़ की ओर से निकलने की संभावना है।
किसानों को सतर्क रहने को कहा
कलेक्टर बसंत कुर्रे ने टिड्डी दल से फसलों के बचाव के लिए किसानों को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि टिड्डी दल छतरपुर, पन्ना होते हुए सीमावर्ती जिले सतना तक आ गया है। रीवा जिले में भी टिड्डी दल के आने की आशंका है। जिले में मूंग, उड़द व मौसमी सब्जियों की फसल लगी है, ऐसे में किसानों को टिड्डी दल से सतर्क रहने की जरूरत है। वह अपने खेतों की लगातार निगरानी करें तथा टिड्डी दल के आने पर थाली, ढोल, डीजे खाली टीन के डिब्बे बजाकर खेतों में तेज ध्वनि करें। पटाखे फोड़कर, ट्रैक्टर का साइलेंसर निकालकर आवाज करें। इन उपायों से टिड्डी दल को उड़ाया जा सकता है। टिड्डी दल का आगमन प्राय: शाम 6 बजे से रात्रि 8 बजे के बीच होता और यह दल सुबह 7.0 बजे दूसरे स्थान के लिए प्रस्थान करता है। ऐसी स्थिति में फसलों की बचाव के लिए उसी रात में तड़के 3 बजे से लेकर सुबह 7.30 बजे तक उक्त तरीकों का उपयोग कर टिड्डी दल को भगाकर फसलों को बचाया जा सकता है।
फसलों पर इनका करें छिड़काव
कृषि वैज्ञानिक अखिलेश कुमार के अनुसार, फसलों को टिड्डी से बचाव के लिए ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर पंप में फ्लोरोपायरीपॅस 20 प्रतिशत ईसी 1200 मिली या डेल्टामेथ्रिम 2.8 प्रतिशत ईसी 625 मिली या डाइफ्ल्यूबेंजूरान 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 120 मिली या लेम्डासायलोथ्रिन 5 प्रतिशत इसी 400 मिली या मेलाथ्रियान 50 प्रतिशत इसी 1850 में से कोई एक दवा का 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर टिड्डी के ऊपर छिड़काव कर फसलों का बचाया जा सकता है।
Published on:
26 May 2020 01:02 am

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