-सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी पहले ही अमानक पटाखो पर लगा चुका है प्रतिबंध
रीवा. सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के तहत कलेक्टर इलैयाराजा टी ने जिले में अममानक पटाखे प्रतिबंधित कर दिया है। कलेक्टर ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को इस पर कड़ी नजर रखने को कहा है ताकि जिले में कहीं भी तेज आवाज और पर्यावरण व इंसान को नुकसान पहुंचाने वाले पटाखे न छोड़ जाएं।
कलेक्टर ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय व एनजीटी के आदेश का उल्लंघन करने वालों पर विस्फोटक नियम 84 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई होगी। कलेक्टर ने कहा है कि पूरे जिले में धीमी आवाज और न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन वाले उन्नत श्रेणी और ग्रीन पटाखे ही छोड़े जा सकेंगे। पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को गुपचुप तरीके से भंडार करने और बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
कलेक्टर ने कहा है कि दीपावली व आगे आने वाले त्योहारों पर रात 8 से 10 बजे तक दो घंटे ही पटाखे छोड़े जा सकेंगे। उन्होंने कहा है कि अगले महीने क्रिसमस और नववर्ष के मौके पर रात 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक पटाखे फोड़े जा सकेंगे।
आदेश के अनुसार ग्रीन पटाखों के लिए पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा आर्गनाइजेशन तथा नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीटक्कूट द्वारा पंजीकृत ग्रीन पटाखों के निर्माताओं की सूची के अनुसार ही विक्रय किया जाएगा। इनके अंतर्गत फुलझड़ी, अनार तथा मेरून आते हैं। बेरियम साल्ट का उपयोग करके बनाए गए पटाखे पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। एंटीमनी, लीथियम, मर्करी, आर्सेनिक, स्ट्रांशियम क्रोमेट एवं लेड के उपयोग से बनाए गए पटाखों की बिक्री व उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। पटाखों का ऑनलाइन तथा ई कामर्स के जरिए भी क्रय एवं विक्रय प्रतिबंधित रहेगा।
कलेक्टर ने कहा है कि जिले के अस्पताल, नर्सिंग होम, जिला चिकित्सालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षण संस्थान, न्यायालय, धार्मिक स्थलों तथा शांत क्षेत्र घोषित एरिया से 100 मीटर की परिधि में पटाखे नहीं छोड़े जा सकेंगे।