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गायनी की ओपीडी बंद : प्रसूताओं में कोरोना को लेकर जागरुकता नहीं, हर रोज 25 से 30 डिलेवरी

वार्ड में बड़ी संख्या में भर्ती हो रहीं गर्भवती महिलाएं

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Now corona is also being investigated before delivery

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रीवा. लॉक डाउन से जीएमएच के शिशु वार्ड में 15 फीसदी मरीज रह गए हैं। कोरोना से बचाव को लेकर गायनी वार्ड में भी ओपीडी बंद कर दी गई है। यहां पर औसत प्रतिदिन 25 से 30 डिलेवरी हो रही है। जिसमें 8-10 प्रसूताओं की डिलेवरी ऑपरेशन से हो रही है। महिला चिकित्सकों ने कोरोना को लेकर अस्पताल में एहतियान प्रसूताओं के बेड दूर-दूर करा दिये हैं। गायनी की विभागाध्यक्ष डॉ. कल्पना यादव ने बताया कि कोरोना से बचाव को लेकर प्रसूताओं को समझाश दी जा रही है।

चिकित्सकों ने प्रसूता व शिशुओं के लिए डिस्टिेंस की दी सलाह
अभी तक ऐसा कोई मरीज नहीं मिला है। पहले की तरह ही डिलेवरी हो रही है। हां यह जरुर है कि कोरोनों को लेकर प्रसूताओं में जागरुकता नहीं है। घर से लेकर अस्पताल आने तक असुरक्षित हैं। उधर, शिशु एवं बाल्य रोग विभाग में मरीजों की संख्या कम हो गई है। कुपोषण इकाई में भी बच्चों को नहीं रखा गया है।

जच्चा-बच्चा के लिए सोशल डिस्टेंस जरूरी
महिला चिकित्सक डॉ. शीतल पटेल कहती हैं गर्भवती महिलाएं घर पर रहें। दवा बहुत जरूरी होने पर ही इस्तेमाल करें। सर्दी, खांसी और जुकाम पर ही आएं। नवजात शिशुओं व प्रसूताओं के लिए साफ-सफाई अति आश्वयक है। साफ पानी व भोजन की सलाह दी हैं। कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंशन अति आश्वयक है। मां के पास नवजात को संक्रमण का खतरा नहीं रहता है।

इधर, संदिग्धों की पहचान के लिए गूगल स्प्रेडशीट मैकेनिज्म
कोविड-19 के संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान एवं कंटेनमेंट परफर्म और क्लस्टर पाए जाने पर क्लस्टर कंटेनमेंट प्लान बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह जानकारी एकत्रित करने के लिए गूगल स्प्रेडशीट मैकेनिज्म द्वारा राज्य स्तर से भी जानकारी भरकर भेजी गई है। राज्य स्तर पर डॉ. सौरभ पुरोहित को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इनका मोबाइल नम्बर 9753776 544 है।