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रानी तालाब मंदिर: आग लगी तो फोन से बुलानी पड़ेगी फायर ब्रिगेड, जानिए क्यों

सुरक्षा इंतजामों में जिला प्रशासन की भारी चूक, मेला क्षेत्र में एक भी फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं

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Suresh Mishra

Apr 10, 2016

rewa news

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रीवा।
नवरात्र में भक्तों की आस्था हिलोरे मार रही है। छोटे बच्चे से लेकर बड़े-बुजुर्ग सभी मां के दर पर माथा टेकने पहुंच रहे हैं। लेकिन लम्बी कतारों में खड़े भक्तों के मन में अंजान भय भी बैठा हुआ है। यहां भक्तों के सुरक्षा के इंतजाम पर्याप्त नहीं है। अगर भूले-भटके एक ङ्क्षचगारी भड़क जाए तो फोन पर फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां बुलानी पड़ेगी। मेला क्षेत्र में इनकी मौजूदगी नदारद है।


केरल के मंदिर में हुए हादसे के बाद पत्रिका टीम ने रानी तालाब स्थित मां कालका के मंदिर में आग से बचाने के सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल की। जिला प्रशासन की भारी चूक सामने आयी। मंदिर परिसर के बाहर मेले का आयोजन किया गया है। करीब 30 से 35 दुकाने यहां मौजूद हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार से परिसर में प्रवेश करते ही दो दर्जन से ज्यादा पूजा सामग्री की दुकानें सजी हुई हैं।


जो नारियल की जटा और चुनर से पटी हैं। हर वक्त करीब डेढ़ से दो हजार लोग यहां मौजूद रहते हैं। लेकिन इन सबके बीच सवाल ये है कि प्रशासन की फायर ब्रिगेड कहां है। पूरे मेला क्षेत्र में एक भी गाड़ी नजर नहीं आ रही है। जबकि प्रोटोकाल के अनुसार इनकी मौजूदगी सुनिश्चित होनी चाहिए थी। मालूम हो कि फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां सिविल लाइंस में खड़ी होती हैं। जहां से रानी तालाब की दूरी लगभग 3 किमी. है।


गौर करने वाली बात ये है कि जिस रास्ते से यहां पहुंचना है। वह भीड़भाड़ वाला है। सिविल लाइंस से रानी तालाब पहुंचने में फायर ब्रिगेड को कम से कम 20 मिनट लगेंगे। आग फैलने के लिए इतना वक्त बहुत होता है। यह जानते हुए भी जिला प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। इस लापरवाही का नतीजा है कि भक्तों के मन में अंजाना खतरा बना हुआ है।


तीन सिलेंडर पर टिकी है सुरक्षा

मंदिर के अंदर, बरामदे और भजन हाल में फायर फाइटिंग सिस्टम के तहत तीन सिलेंडर लगे हैं। अर्थात मां के दरबार में माथा टेकने पहुंचे रहे हजारों भक्तों की सुरक्षा तीन सिलेंडरों पर निर्भर है।


बीते वर्ष यहां भड़की थी चिंगारी

बता दें रानी तालाब मंदिर में बीते वर्ष चिंगारी भड़की थी। परिसर में पूजा सामग्री की दुकान चलाने वाले राजेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि कचरे के ढेर में आग सुलगी। गनीमत रही कि समय पर लोगों ने उठते धुंए को देख लिया और आग की लपटें उठने से पहले बुझा दी गई। वरना बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता था।


प्रधान पुजारी ने कहा...

तालाब में पानी है और नलकूप भी लगे हैं। लेकिन आग लगने पर लोग खड़े नहीं रहते। भगदड़ मचती है जो हादसे में तब्दील होती है। फायर ब्रिगेड की कम से कम एक गाड़ी तो होनी ही चाहिए। इससे भक्तों को मानसिक बल मिलेगा और इमरजेंसी पर आपदा से निपटने का तैयार रहेंगे।

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