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मोहल्लों में साप्ताहिक बाजार की सुविधा परिकल्पना तक सीमित, इंतजार में शहरी

महापौर ने अपनी प्राथमिकताओं में इसे गिनाया था, एक साप्ताहिक बाजार के चलते बढ़ रही लोगों की समस्याएं

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Weekly market facility is limited to hypothesis

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रीवा. साप्ताहिक बाजार का अपना अलग ही महत्व होता है। अभी केवल सोमवार को मानसभवन के बगल में साप्ताहिक बाजार लग रहा है। जहां शहर के विभिन्न हिस्सों के लोग खरीददारी करने के लिए आते हंै। इनके साथ ही आसपास के गांवों से भी लोग पहुंच रहे हैं।

कई बार उठाई गई मांग
कई बार मांग उठाई गई कि शहर के अलग-अलग स्थानों पर साप्ताहिक बाजार की व्यवस्था कराई जाए, ताकि उन मोहल्लों के लोग अपनी जरूरत से जुड़ी सामग्री वहीं पर खरीद सकें। उन्हें इसके लिए दूर नहीं जाना पड़े। इस मामले में महापौर ममता गुप्ता ने स्वयं रुचि दिखाई थी और उन्होंने अधिकारियों से इसका प्रस्ताव तैयार करने के लिए भी कहा था। लेकिन इस मामले में अधिकारियों ने गंभीरता नहीं ली और कोई नई व्यवस्था नहीं बनाई जा सकी।

दूसरे शहरों में सफल रहे प्रयोग
दूसरे कई शहरों ने इस पर प्रयोग किया और सफल भी रहे हैं। उससे छोटे व्यवसाइयों को सप्ताह के हर दिन का काम मिल गया और शहर के बीच में अव्यवस्थित रूप से लगने वाले ठेले और फुटपाथ से भी निजात मिली है। रीवा में यह व्यवस्था आवश्यक समझी जा रही है कई संगठनों ने कहा है कि मोहल्लों में साप्ताहिक बाजार लगाने से उन क्षेत्रों का भी विकास होगा।

इन स्थानों पर साप्ताहिक बाजार की उठी थी मांग
शहर के कई ऐसे स्थान हैं जहां पर सप्ताह के कुछ निर्धारित दिनों में लोगों की भीड़ जुटती है। उसी दिन उसके आसपास साप्ताहिक बाजार लगाने की मांग की गई थी। चिरहुला हनुमान मंदिर में मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की अधिक संख्या उमड़ती है इस कारण वहां भी बाजार की मांग की गई है। इसी तरह नेहरू नगर से रतहरा के बीच, नीम चौराहे से अनंतपुर के मध्य का क्षेत्र, ढेकहा, पडऱा, निपनिया सहित अन्य कई स्थानों पर साप्ताहिक बाजार स्थापित करने की मांग उठती रही है।