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170 साल पहले मंदिर को दान में मिली जमीन, भू माफियाओं ने रजिस्ट्री करा मिशनरी को बेच दी

ग्रामीणों और हिंदू संगठनों की खोजबीन में ब्रिटिश काल का एक दस्तावेज मिला है, जिसके अनुसार 170 साल पहले यानी 1855 में मंदिर को दान की गई थी

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सागर

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Madan Tiwari

Jan 12, 2025

भापेल गांव में चर्च निर्माण विवाद :- राजस्व अमले के साथ सांठगांग की, जमीन की कीमत बढ़ाने रेकॉर्ड में भी छेड़छाड़ करने के आरोप

सागर. नरयावली विधानसभा के भापेल गांव में सिद्ध क्षेत्र बाबा फूलनाथ महादेव मंदिर के आसपास की जमीन मिशनरी को बेचने का मामला तूल पकड़ गया है। ग्रामीणों और हिंदू संगठनों की खोजबीन में ब्रिटिश काल का एक दस्तावेज मिला है, जिसके अनुसार 170 साल पहले यानी 1855 में मंदिर को दान की गई थी और मंदिर की पूजा करने वाले तत्कालीन गिरी समाज के पुजारियों को जमीन के रखरखाव आदि की जिम्मेदारी थी। पड़ती पड़ी इस जमीन पर शहर के कुछ भू-माफियाओं की नजर पड़ी तो उन्होंने राजस्व अधिकारियों के सांठगांठ कर दान की इस जमीन की खुद के नाम रजिस्ट्री करा ली, इसके बाद उसे मिशनरी को बेच दिया।

- खसरा नंबर में हुई अदला-बदली

जानकारी के अनुसार शहर के कॉलोनाइजर ने मंदिर से लगी यह 14.50 एकड़ जमीन 25 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी थी। इसके बाद जमीन के रेट बढ़ाने राजस्व अमले के साथ मिलकर खसरा नंबर की अदला-बदली कर रेकार्ड में भी फेरबदल कराने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि सागर-भोपाल नेशनल हाइवे से लगी सरकारी जमीन का खसरा बदला तो वह पहाड़ी पर पहुंच गई और रोड से लगकर खुद की खरीदी जमीन का खसरा नंबर चढ़वा लिया गया। इसके बाद इस जमीन को करीब एक करोड़ रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मिशनरी को बेच दिया। यानी माफियाओं ने इस जमीन से करीब 10 करोड़ रुपए पैदा किए।

- पहाड़ खोद डाला

मिशनरी ने भापेल में खरीदी करीब 14.50 एकड़ जमीन पर काम शुरू कर दिया है। इस दौरान समतलीकरण करने के चक्कर में यहां मिशनरी की ओर से काम कर रही एजेंसी ने आसपास लगा पहाड़ तक खोद डाला। वहीं ग्रामीण अवैध उत्खनन के आरोप भी लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि पहाड़ी की खुदाई से यहां विचरण करने वाले वन्यजीवों को खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा पहाड़ी पर बड़ी संख्या में मोरों का बसेरा है वह भी प्रभावित हुआ है।

- यह है मामला

भापेल गांव में बाबा फूलनाथ महादेव का सिद्ध धाम है। यहां आसपास पड़ी खाली जमीन पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा से तीन दिन का मेला लगता है। मंदिर को दान में मिली इस जमीन पर कुछ समय पहले मिशनरी संस्था ने निर्माण शुरू कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने पड़ताल की तो पता चला कि यह जमीन शहर के एक कॉलोनाइजर ने मिशनरी को बेची है, जहां संस्था चर्च सहित अन्य निर्माण कार्य कर रही है। इसके बाद हालही में मिशनरी के निर्माण को रुकवाने नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने कलेक्टर को पत्र लिखा था।