
3 people including husband and wife will be given life after death
राहतगढ़. मृत देह किसी काम की नहीं होती, लेकिन इसी मृत देह के जरिए मेडिकल छात्र काबिल चिकित्सक अवश्य बन सकते हैं। एमबीबीएस और बीडीएस की शिक्षा में मृत देह का ठीक वैसे ही महत्व है जैसे किसी मकान के निर्माण में नींव का। लेकिन लोगों में जागरूकता न होने से देहदान की कमी है। जिसका असर मेडिकल शिक्षा पर पड़ता है।
चिकित्सा क्षेत्र की अहमियत को समझते हुए शनिवार को बुन्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज की टीम के सामने नगर के एमपी ऑनलाइन कियोस्क के संचालक सत्येंद्र जैन, उनकी पत्नी हेमलता जैन एवं पटवारी पद के लिए चयनित गुड्डू खान ने देहदान करने का संकल्प लिया है। गुड्डू ने बताया कि लोगों में जागरूकता का अभाव होने के कारण देहदान नहीं करते। कई जगह धार्मिक रीति-रिवाज व परम्पराएं भी ऐसा करने से रोकती हैं। इसलिए सभी को जागरूक होने की जरूरत है। एक देह कई लोगों की जिंदगी बचाने में उपयोगी साबित होगी। उन्हें दोबारा जिंदगी जीने का भी मौका मिलता है।
ऐसे कर सकते हैं देहदान
मेडिकल शिक्षण संस्थान में सहमति फॉर्म नि:शुल्क उपलब्ध रहता है। फार्म भरने वाले शख्स को इसमें दो गवाहों के नाम दर्ज कराने पड़ते हैं जिनमें परिवार के सदस्य भी हो सकते हैं। जब पंजीकृत व्यक्ति की मौत हो तो सूचना के बाद देह मेडिकल शिक्षण संस्थान को सौंपना पड़ता है। आवेदन में देहदान करने वाले का नाम, पता, फोन नंबर और सबसे नजदीकी रिश्तेदार का ब्योरा होता है। परिजनों की सूचना पर मेडिकल का स्टाफ पहुंचकर पंचनामा के बाद देह को ले जाते हैं।
केवल सामान्य मौत वाले शव ही होते हैं उपयोगी
बुन्देलखण्ड मेडिकल कॉलेज में एनॉटोमी विभाग के मॉडलर वृन्दावन मालवीय ने बताया कि केवल उन्हीं व्यक्तियों की देह स्वीकार की जाती है जिनकी मृत्यु सामान्य हालत में हुई हो। क्षतविक्षत शव उपयोगी नहीं होती है। क्योंकि इनके शरीर में फॉर्मालीन नाम का रासायनिक पदार्थ भरना नामुमकिन हो जाता है। जो शरीर को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है। अगर किसी को कोई गंभीर बीमारी एचआईवी, हेपेटाइटिस आदि हो तो उसका उल्लेख करना आवश्यक होता है। अभी तक 142 लोगों द्वारा देहदान के लिए पंजीयन कराया जा चुका है।
इलाज में परिजनों को भी मिलती है सुविधा
मेडिकल कॉलेज में जिस व्यक्ति का देहदान होता है उसके करीबी रिश्तेदारों को हर प्रकार के इलाज में 50 प्रतिशत छूट दी जाती है। साथ ही उपचार में विशेष रूप से प्रशासन ध्यान भी देता है। यह व्यवस्था कुछ ही वर्ष पूर्व से ही लागू की गई है, जिसका इसका व्यापक
असर भी नजर आ रहा है।
Published on:
10 Jun 2018 11:09 am
बड़ी खबरें
View Allसागर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
