
Assembly Elections and Challenges
सागर. नजदीक आते विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के युवा कार्यकर्ता मुखर होकर मैदान में उतर आए हैं। बुजुर्ग नेता भी पर्दे के पीछे से दावेदारी कर रहे हैं। किसी ने जन-संवाद का रास्ता अपनाया है, तो कोई बुजुर्ग नेताओं का घर-घर जाकर सम्मान, तो कोई झील की सफाई करके सक्रियता बता रहा है। अन्य दावेदार धार्मिक आयोजन कर महिला मतदाताओं में पैठ जमाने की फिराक में हैं।
इसके अलावा कई भोपाल और दिल्ली के नेताओं से सीधे संपर्क में हैं। पिछले दिनों आए पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के समक्ष कई कार्यकर्ताओं ने दावेदारी की हैं। बहरहाल टिकट की दावेदारी करने वालों की अपनी मजबूती और कमजोरियां हैं।
यह दावेदारों का मजबूत पक्ष और कमजोरी
नरेश जैन
मजबूत पक्ष- अनुभवी, संगठन के विभिन्न पदों पर कार्य किया, धनाड्य, पारिवारिक राजनीतिक बैक ग्राऊंड, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से नजदीकी छात्रसंघ
के पूर्व अध्यक्ष।
कमजोरी- लंबे समय से पार्टी की गतिविधियों तक ही सीमित, क्षेत्र
में लगातार सपंर्क की कमी।
सुनील जैन
मजबूत पक्ष- अनुभवी, देवरी
से पूर्व विधायक, युवा वर्ग में
खासी पहचान, मिलसार,
धनाड्य, पत्रकार।
कमजोरी- शहर की राजनीति
में सक्रियता कम, ग्रामीण
क्षेत्र की छाप।
नेवी जैन
मजबूत पक्ष- धनाड्य परिवार से, युवा वर्ग में अच्छी पकड़, लोगों की समस्याओं को लेकर जन संवाद अभियान चलाया, पद से स्तीफा देकर शहर में सक्रिय।
कमजोर पक्ष- अनुभव की कमी, परिजनों की सलाह पर ही निर्भर।
मुकुल पुरोहित
मजबूत पक्ष- युवाओं के बड़े वर्ग में पहचान के साथ अच्छी टीम, समय समय पर पार्टी की गतिविधियों के साथ, स्वयं के कार्यक्रम बनाए, बुजुर्ग नेताओं का सम्मान की पहल।
कमजोरी- अनुभव की कमी।
भूपेंद्र सिंह मौहासा
मजबूत पक्ष- राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह से नजदीकी, राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी, युवा चेहरा,
आईटी में दक्ष।
कमजोरी- शहर में सक्रियता की कमी, युवाओं के खास धड़े से ही संबंद्ध, ऊपरी स्तर पर ही सक्रिय।
अमित रामजी दुबे
मजबूत पक्ष- पूर्व प्रदेश प्रभारी, युवा बस ऑपरेटर, शहर के युवाओं में खासी पकड़, शहर के मुद्दों से भलीभांति परिचित, एेतिहासिक झील के संरक्षण के लिए चिंतित।
कमजोरी- क्षेत्र विशेष तक सीमित।
Published on:
08 Jun 2018 05:58 pm
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