
सागर। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का प्रथम तल इसी वर्ष दिसंबर तक तैयार हो जाएगा। जनवरी 2024 में रामलला अपने भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान होंगे। मंदिर निर्माण में देशभर के भक्तों का धन उपयोग किया जा रहा है। वे आस्था के अनुसार दान दे रहे हैं। इसमें नेता और राजनीतिक दलों को जोड़ना उचित नहीं। मंदिर और राजनीति अलग-अलग हैं। भगवान श्रीराम पूरे देश की आस्था का केंद्र हैं। दशकों से मंदिर निर्माण का सपना भक्त दे रहे थे और अब यह स्वप्न साकार होने जा रहा है।
यह बात श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने बुधवार को पत्रिका से खास बातचीत में कही। उन्होंने यह भी कहा कि मायावती, केजरीवाल जैसे राजनेता चंदा देने नहीं आए।
क्या आप मानते हैं कि मंदिर निर्माण के नाम पर राजनीति हो रही है और क्या इस तरह होना चाहिए?
मंदिर के नाम पर कोई राजनीति नहीं हो रही और ना ही होनी चाहिए। मंदिर का निर्माण केवल भक्तों के धन से हो रहा है। भगवान का भक्त कोई भी हो सकता है। अयोध्या में रामलला का अद्वितीय मंदिर बने, इसके लिए कोई कसर नहींछोड़ी जा रही।
राम मंदिर में दलित रसोइये और पुजारी की नियुक्ति की बात चल रही है, इस पर क्या कहेंगे?
यह बात पूरी तरह से अफवाह है। रामलला की सेवा में ऐसी किसी नियुक्ति के संबंध में फिलहाल मुझे जानकारी नहीं है। अभी श्रीराम मंदिर निर्माण का कार्य तेज गति से चल रहा है। मंदिर निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद ही इस तरह के मसले पर निर्णय होगा।
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Updated on:
09 Feb 2023 11:33 am
Published on:
09 Feb 2023 11:32 am
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