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राजसी प्यार: जब बाजीराव को उपहार में मिली मस्तानी

प्यार और बुंदेलखंड का गहरा नाता रहा है। यहीं छत्रसाल का प्यार परवान चढ़ा तो यहीं उनकी बेटी मस्तानी का। यहां प्यार की निशानी के रूप में प्रवीण महल बना तो यहीं एक राजा ने नटनी के प्यार में शीश महल बनाया।

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Widush Mishra

Feb 15, 2016

सागर.प्यार, इश्क और मोहब्बत। इन शब्दों को सुनते ही प्यार करने वालों की धड़कनें तेज हो जाती है। प्यार का अहसास ही दुनिया की हर खुशी से बड़ा लगता है। प्यार और बुंदेलखंड का गहरा नाता रहा है। यहीं छत्रसाल का प्यार परवान चढ़ा तो यहीं उनकी बेटी मस्तानी का। यहां प्यार की निशानी के रूप में प्रवीण महल बना तो यहीं एक राजा ने नटनी के प्यार में शीश महल बनाया।


अमर है बाजीराव और मस्तानी
प्यार की बात हो और मस्तानी को छोड़ दिया जाए तो सबकुछ अधूरा सा लगता है। बुंदेलखंड नरेश महाराजा छत्रसाल की बेटी मस्तानी ने बाजीराव पेशवा के प्यार में अपना घर-बार सब छोड़ दिया था। मस्तानी की मां रुहानी बाई थीं, जो हैदराबाद के निजाम के राज दरबार में नृत्यांगना थीं। छतरपुर जिले से 15 किमी दूर मऊ साहनिया में आज भी मस्तानी महल है। मस्तानी को राजनीति, युद्धकला, तलवारबाजी और घर के कामों का पूरा प्रशिक्षण मिला हुआ था।


बाजीराव मस्तानी बना एक नाम
मस्तानी के बारे में कहा जाता है कि वह बहुत ही खूबसूरत थीं। उन्हें अपनी मां की ही तरह नृत्य में कुशलता हासिल थी। कहते हैं कि मस्तानी ने बाजीराव की मृत्यु के बाद जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि मस्तानी बाजीराव पेशवा से इतना प्यार करती थीं कि चिता में कूद कर सती हो गई थीं। उनकी मौत सन 1740 में बताई जाती है। अभी हाल ही में बाजीराव और मस्तानी पर बॉलीवुड में फिल्म भी बनी, जो खूब चर्चाओं में रही। बिजनेस भी अच्छा खास किया।


बाजीराव ने लड़े 41 युद्ध
अब लौटते हैं पुरानी कहानी पर...300 साल पहले, सन 1700 में छत्रपति शिवाजी के पौत्र शाहूजी महाराज ने बाजीराव के पिता बालाजी विश्वनाथ की मौत के बाद उसे अपने राज्य का पेशवा यानी प्रधानमंत्री नियुक्त किया। 20 साल की उम्र में कमान संभालने वाले बाजीराव ने अपने शासन काल में 41 युद्ध लड़े और सभी में जीत हासिल की। बचपन से बाजीराव को घुड़सवारी, तीरंदाजी, तलवार, भाला, बनेठी, लाठी आदि चलाने का शौक था। पेशवा बनने के बाद अगले बीस वर्षों तक बाजीराव मराठा साम्राज्य को बढ़ाते चले गए।


मोहम्मद खान बंगश ने किया था हमला
सन 1727-28 के दौरान महाराजा छत्रसाल के राज्य पर मुसलमान शासक मोहम्मद खान बंगश ने हमला बोल दिया था। बताया जाता है कि खुद पर खतरा बढ़ता देख छत्रसाल ने बाजीराव को एक गुप्त संदेश भिजवाया। इस संदेश में छत्रसाल ने बाजीराव से मदद की मांग की। बाजीराव ने छत्रसाल की मदद की और मोहम्मद बंगश से उनका साम्राज्य बचा लिया। छत्रसाल, बाजीराव की मदद से काफी खुश हुए और खुद को उनका कर्जदार समझने लगे।

उपहार में दी थी मस्तानी
इस कर्ज को उतारने के लिए छत्रसाल ने अपनी बेटी मस्तानी, बाजीराव को उपहार में दे दी थी। बाजीराव पहली ही नजर में मस्तानी को दिल दे बैठे थे। उन्होंने मस्तानी को अपनी दूसरी पत्नी बनाया। मस्तानी भी बाजीराव के प्यार में खुशी-खुशी घर छोड़ गई थी।