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औचित्यहीन बना बीएमसी का इमरजेंसी मेडिसिन विभाग, मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ

एक साल से ऑपरेशन भी नहीं हुआ, अधिकारियों के वार्डों में न तो राउंड रहता है न ओपीडी और ना ही कोई लेक्चर

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सागर

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Murari Soni

Oct 20, 2024

सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी मेडिसिन विभाग औचित्यहीन बना हुआ है। आपात स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर्स का लाभ नहीं मिल रहा है। कहने के लिए यहां शासन ने यहां आपातकालीन केस हैंडल करने में माहिर तीन-तीन अधिकारी तैनात कर रखे हैं और हर हर माह 5 लाख रुपए से अधिक का वेतन दिया जा रहा है, लेकिन अधिकारी इमरजेंसी केस नहीं देख रहे, सिर्फ कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर के भरोसे पूरी व्यवस्थाएं संभाली जा रहीं हैं।बीएमसी में करीब डेढ़ साल पहले मरीजों का गोल्डन समय बचाने और एक्सीडेंटल केसों में मरीजों को त्वरित राहत देने के लिए इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोला गया था। विभाग में पिछले साल एक ऑपरेशन थियेटर व 6 बेड के आइसीयू वार्ड भी बनाया गया था। मरीज को यदि तत्काल ऑपरेशन की आवश्यकता है तो तत्काल ऑपरेशन, यदि हार्ट का पेंशेंट है तो उसे तत्काल इलाज मिले, लेकिन यह उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा।

दोपहर बाद बंद हो जाता है विभाग-

इमरजेंसी केस हैंडल करने विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र उइके एनेसथीसिया, पीडियाट्रिक सर्जन विशाल गजभिए और पल्मोनरी मेडिसिन सौरभ जैन की पोस्टिंग है। तीन विशेषज्ञों को हर साल करीब 60 लाख रुपए तो सिर्फ वेतन दिया जा रहा है, आवास सहित कई सुविधाएं भी मिल रहीं हैं। इमरजेंसी मेडिसिन विभाग को इसी साल 3 पीजी सीट मिलीं है। अभी इन अधिकारियों की न तो ओपीडी रहती है, ना ही वार्डों में राउंड होते हैं और ना ही कोई लेक्चर देने पड़ते हैं फिर भी अधिकारी इमरजेंसी मेडिसिन विभाग दोपहर बाद बंद हो जाता है।

एक ऑपरेशन कर हाथ खड़े कर लिए-

इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में एक माइनर ओटी पहले से थी और पिछले साल एक मेजर ओटी की शुरूआत की गई थी। तत्कालीन डीन डॉ. आरएस वर्मा की मौजूदगी में एक मरीज का ऑपरेशन कर मेजर ओटी का शुभारंभ किया गया था, तब से लेकर अब तक मेजर ओटी में कोई ऑपरेशन नहीं हुआ।

अधिकारी केस हैंडल करें तो जान बचाने में मिलेगी मदद-

कैजुअल्टी वार्ड में अभी सभी विभागों के पीजी डॉक्टर और कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर कार्य कर रहे हैं। इमरजेंसी केस आने पर मरीजों को संबंधित वार्ड तक भेजा जाता है। इसमें 5-10 मिनट का समय लग जाता है, हार्ट अटैक, एक्सीडेंटल केस में यह मरीज का गोल्डन समय होता है। यदि मौके पर ही विशेषज्ञ डॉक्टर होंगे तो मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी।

-अभी तक इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में पीजी सीट नहीं थीं, अब 3 सीटें मिल गईं हैं, अगले माह से व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी जाएंगी। किसी भी प्रोफेसर, एसोसिएट व असिस्टेंट की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डॉ. सत्येंद्र उइके, इमरजेंसी मेडिसिन विभागाध्यक्ष।