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गर्मी में मूंग की जगह मूंगफली की फसल लगाने किसानों को करेंगे जागरूक, जिससे कीटनाशक दवाओं का उपयोग हो कम

कृषि विभाग भी उपलब्ध कराएगा बीज, पिछले दो वर्षों में बढ़ा है मूंग का रकवा

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Farmers will be made aware to plant peanuts instead of green gram in summer, so that the use of pesticides is reduced.

फाइल फोटो

बीना. पिछले दो वर्षों से किसान गर्मी में मूंग की फसल की बोवनी ज्यादा कर रहे हैं, जिससे किसानों को तीसरी फसल का लाभ मिल जाता है, लेकिन इस फसल में ज्यादा मात्रा में डाली जा रही कीटनाशक दवाएं जमीन और लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। कीटनाशक दवाओं का प्रयोग कम हो इसके लिए कृषि विभाग ने इसके विकल्प के रूप में मूंगफली की फसल को चुना है।
क्षेत्र में पिछले वर्ष गर्मी में मूंग की बोवनी करीब 2000 हेक्टेयर में हुई थी। मूंग की फसल में पानी की जरूरत ज्यादा होती है और कीटों का प्रकोप रोकने के लिए कीटनाशक दवाओं का उपयोग ज्यादा किया जाता है। कीटनाशक दवाओं का उपयोग ज्यादा होने पर पिछले वर्ष सरकार ने मूंग को जहरीला बताते हुए समर्थन मूल्य पर खरीदी करने से इंकार कर दिया था। इसके बाद लगातार हुए प्रदर्शनों के बाद मूंग खरीदी गई थी। इस वर्ष यह स्थिति निर्मित न हो इसके लिए कृषि विभाग ने अभी से तैयारी कर ली है और किसानों को मूंग की जगह मूंगफली की बोवनी करने जागरूक किया जा रहा है। गर्मी में मूंगफली की फसल की बोवनी पहली बार की जाएगी।

50 हेक्टेयर का बीज कृषि विभाग कराएगा उपलब्ध
कृषि विभाग किसानों को मूंगफली की बोवनी के लिए प्रेरित करने करीब 50 हेक्टेयर का बीज नि:शुल्क उपलब्ध कराएगा। जल्द ही बीज कृषि विभाग में आ जाएगा, जिससे समय पर किसानों को बीज मिल सके।

किसानों को आएगी बीज की समस्या
मूंगफली के बीच को लेकर किसानों को परेशानी आएगी, क्योंकि पहली बार गर्मियों में इस फसल की बोवनी होना है और बाजार में बीज उपलब्ध नहीं है। इस ओर भी अधिकारियों को ध्यान देना होगा।

मार्च से हो जाती है बोवनी शुरू
मसूर और मटर की फसल कटने के बाद किसान मार्च में ही मूंग की बोवनी शुरू कर देते हैं, जिससे बारिश के पूर्व इसकी कटाई हो जाती है। इसलिए अभी से किसानों को बीज उपलब्ध कराना होगा।

किया जा रहा है किसानों को जागरूक
मूंग की फसल में पानी ज्यादा लगता है और कीटनाशक दवाओं का उपयोग भी ज्यादा हो रहा है, इसलिए इस फसल की जगह मूंगफली की बोवनी करने किसानों को जागरूक किया जा रहा है। करीब 50 हेक्टेयर के लिए बीज भी उपलब्ध कराया जाएगा।
अवधेश राय, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, बीना