
अभिनंदन नगर रजाखेड़ी मकरोनिया में विगत 8 सितंबर से 14 सितंबर तक संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा हुई। कथावाचक संतोष कृष्ण ने कहा कि यदि प्राणी अपने मन को भगवान की भक्ति में लगाता है, तो उसका संपूर्ण जीवन ईश्वर की छत्रछाया में सुरक्षित रहता है। मां के संचालन से लेकर प्राणी के भवसागर पार करने तक का कार्य स्वयं भगवान करते हैं। कथा वाचक ने भगवान शिव की महिमा का विशेष रूप से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि शिव ऐसे देवता हैं, जो न केवल देवताओं के भी देवता हैं, बल्कि वे भाग्य का लिखा हुआ भी बदल सकते हैं। इसी कारण उन्हें महादेव कहा जाता है। शिव का स्मरण करने मात्र से जीवन में आने वाले संकट दूर हो जाते हैं और साधक को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
उन्होंने कामदेव और रति की कथा का उदाहरण देते हुए समझाया कि जब कामदेव ने भगवान शिव के ध्यान में विघ्न डालने का प्रयास किया, तब शिव ने अपने क्रोधाग्नि से उसे भस्म कर दिया। किंतु रति के करुण विलाप को देखकर शिव ने करुणा की वर्षा करते हुए कामदेव को अनंग रूप में पुनर्जीवित कर दिया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि भगवान शिव केवल संहारक ही नहीं, बल्कि करुणा और पुनरुत्थान के भी प्रतीक हैं। अंतिम दिन कथा पूर्णाहुति के उपरांत महाआरती और प्रसाद वितरण हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
Published on:
15 Sept 2025 04:53 pm
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