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झील संवारने एक मंच पर आए शहरवासी, हर कीमत पर झील की रक्षा को तैयार

हस्तमुक्त घोषणाएं - निगम ने सुनी सबकी पर की अपने मन की

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City dwellers came to the platform on a lake

City dwellers came to the platform on a lake

सागर. शहर में जब भी डॉ. सर हरिसिंह गौर और लाखा बंजारा झील की बात आती है तो लोग भावनात्मक हो जाते हैं। एेसा ही कुछ मंगलवार को निगम कार्यालय में डी-सिल्टिंग के लिए बुलाई गई सुझाव बैठक में देखने मिला। कुछ लोगों ने डी-सिल्टिंग न किए जाने की बात कही तो कुछ ने इसका समर्थन किया। कुछ ने गर्मी को देखते हुए रात में श्रमदान करने का सुझाव दिया। जनप्रतिनिधियों ने बैठक में सबके सुझाव सुने तो लेकिन उन सुझावों को अन्य योजनाओं के तहत किए जाने की बात कहकर मामले से बच लिया। बैठक में एक दर्जन से ज्यादा लोगों ने मौके पर ही निगम प्रशासन को झील की डी-सिल्टिंग में आर्थिक सहयोग देने का एेलान किया।
बैठक में ये बोले जिम्मेदार
विधायक शैलेंद्र जैन बोले मैंने चार बार सीएम से पैसे मांगे। भोपाल में अधिकारियों ने कहा कि पैसे नहीं हैं लेकिन जब मैंने बार-बार प्रयास किए तो १० करोड़ स्वीकृत हो गए, पहली किश्त में २.६९ करोड़ रुपए की राशि जल्द मिल जाएगी।
महापौर अभय दरे ने कहा कि झील के लिए यह प्रयास छोटा है। २४० करोड़ की बड़ी योजना लंबित है। सभी लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि पूरा काम पारदर्शिता के साथ किया जाएगा। नालों की गंदगी रोकने के लिए सीवर का काम होगा।
कलेक्टर आलोक कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. हरिसिंह गौर और झील को
लेकर शहर में गजब का उत्साह है। कक्ष में जमा हुई भीड़ इस बात की गवाही दे रही है। मैं जल्द ही सभी विभागों की बैठक कर झील के लिए हरसंभव मदद करने तैयार हूं। नालों के अतिक्रमण के साथ, जो भी अन्य अव्यवस्थाएं हैं, आप सभी एकमत होकर मुझे बताएं, १५ दिन में शहर की तस्वीर बदल जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष अजय परमार बोले, विपक्ष व कांग्रेस डी-सिल्टिंग की विरोधी नहीं है। हमारा पूरा समर्थन है लेकिन प्रयास बड़ा होना चाहिए। महापौर काम तो करते हैं पर देरी से शुरुआत होती है। इसके पीछे यह वजह है कि उन्हें भोपाल व दिल्ली में नेताओं का सहयोग नहीं मिलता है।
नाले रोकने के लिए क्या
& नालों को बंद नहीं करेंगे तो डी-सिल्टिंग का कोई मतलब नहीं। फिर भी यह प्रयास करें लेकिन प्लानिंग पुख्ता बनाएं। - इंजी. प्रकाश चौबे
& अच्छा प्रयास है और भी अच्छा कर सकते हैं। घाटों की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। - डॉ. दिवाकर मिश्रा
& झील में मिलने वाले माननीयों के नाले-नालियों को रोकने के लिए क्या किया आज तक। - डॉ. धर्णेंद्र जैन
& झील की बात हो रही है तो छोटी झील का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
- एड. अंकलेश्वर दुबे
& झील के पानी का उपयोग किसानों व शहर में हरियाली बनाने के लिए कर सकते हैं। - एड. अतुल मिश्रा
इनकी रही उपस्थिति
बैठक में निगमाध्यक्ष राजबहादुर सिंह, निगमायुक्त अनुराग वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभुदयाल पटेल, सुखदेव मिश्रा, शैलेष केशरवानी, लक्ष्मणसिंह ठाकुर, नितिन बंटी शर्मा, राजेश सैनी, गोविंद जडिय़ा, मुकेश जैन ढाना, डॉ. अरुण सराफ, वरिष्ठ पार्षद नरेश यादव, याकृति जडि़या, उपायुक्त डॉ. प्रणय कमल खरे समेत अन्य की उपस्थिति रही।
...और ये बड़ी घोषणा
बिल्डर अजय दुबे ने बड़ी घोषणा कर कहा कि मानसून आने तक डी-सिल्टिंग के लिए जितनी भी जेसीबी चलेंगी, उनके डीजल का खर्च वे उठाएंगे। उन्होंने २५ हजार रुपए देने की भी घोषणा की। इससे यह तो यह है कि जनभागीदारी से ही डी-सिल्टिंग
हो जाएगी। इस पर जिम्मेदारों ने और प्रयास किए तो निगम को एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा।