22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

video: चौबीस घंटे सिर पर मंडरा रही मौत, जिम्मेदारों को खबर नहीं

जिम्मेदारी अधिकारियों की लापरवाही कई बार बड़ी घटना को जन्म देती है और पूर्व में ऐसे मामले सामने आ भी चुके हैं, लेकिन इनसे कोई सबक नहीं लिया जाता है।

2 min read
Google source verification
Death looming over the head 24 hours

Death looming over the head 24 hours

बीना. रेलवे कॉलोनी में कई आवास पूरी तरह से जर्जर हो चुके है जिनमें रहना रेलकर्मियों के लिए खतरे से खाली नहीं है। हाल यह है कि कहीं छत का प्लास्टर निकला हुआ है तो कहीं दीवारों में दरारें आ गई है। जिनके गिरने का डर बना रहता है। इसके अलावा जो रेलकर्मी अभी आवासों में रह रहे है उनकी थोड़ी बहुत मरम्मत करा दी गई थी लेकिन वह अंदर से कमजोर होने से कभी भी ढह सकते हैं। लखनऊ में 16 सितंबर को रेलवे कॉलोनी में आवास की छत गिरने से एक ही परिवार के तीन बच्चों सहित पांच लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद जंक्शन पर दोनों रेलवे कॉलोनी में स्थित रेलवे कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों व उनके परिवार में डर का माहौल है। उन्हें भी जर्जर आवास के गिरने का डर बना हुआ है। पूर्वी रेलवे कॉलोनी में अधिकांश ऐसे रेलवे कर्मचारी रहते है जिनके छोटे बच्चे है, इन्हें सबसे ज्यादा डर सताता है।

भय के साये में जी रहे कर्मचारी
बाजार में मकान किराए से लेने में रेल कर्मचारियों के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने पड़ते है, इसलिए रेलवे की इस सुविधा का लाभ अभी कई रेल कर्मचारी ले रहे हैं। दीवारों में दरारें दिखाई दे रहीं हैं जो बारिश में और भी ज्यादा खतरनाक हो जाती है। कुछ वर्ष पहले खंडहर आवास के गिरने से रेल कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी रेलवे ने सबक नहीं लिया है।

patrika IMAGE CREDIT: patrika

करा दिया जाता है रंग रोगन
जिन आवास में अभी रेलकर्मी रह रहे हैं उनका मेंटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति कर दिया जाता है, ताकि उन्हें अच्छा दिखाया जा सके। इसके लिए ऊपर के खप्पर को हटाकर शेड लगा दिया गया है, लेकिन चारों तरफ बनी दीवारों को गिरने से बचाने के लिए रेल पटरियों के टुकड़ों के सहारे साधकर रखा गया है।
कटता है पैसा
खंडहर हो चुके इन आवास में जो कर्मचारी रहते हैं उन कर्मचारियों के वेतन से आवास का किराया लिया जाता है। खंडहर आवास में रहने वालों से किराया लेने का मतलब है कि रेलवे खुद आवास तोडऩा नहीं चाहती है।
नोटिस के बाद भी स्कूल नहीं की शिफ्ट
शासकीय हायरसेकण्डरी स्कूल क्रमांक दो रेलवे की जर्जर भवन में संचालित हो रही है। हाल यह है कि यह भवन कब गिर जाए कहा नहीं जा सकता है। रेलवे ने स्कूल प्रबंधन के लिए भवन खाली करने के लिए नोटिस भी दिया था लेकिन न तो प्रबंधन ने नोटिस का जबाव दिया न ही भवन खाली किया। जिससे विद्यार्थियों को जान का खतरा बना हुआ है।