
Dr Harisingh Gaur Central University case New Boy's hostel
विवि प्रशासन ने निर्माण एजेंसी को टर्मिनेट कर सीपीडब्ल्यू को सौंपा जिम्मा
हॉस्टल तैयार न हो पाने के कारण विवि के कई छात्रों को किराए के भवन में रहना पड़ रहा
सागर. डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। एक तरफ राष्ट्रपति की टीम यहां पर फर्जी नियुक्तियों की जांच करी है तो दूसरी तरफ पुराने निर्माण कार्य भी अधर में लटके हुए हैं। न्यू बॉयज हॉस्टल की बात करें तो लगभग ४ साल पहले हॉस्टल को तैयार करने का काम शुरू हुआ था, लेकिन यह काम पिछले छह महीने से बंद पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि अभी तक महज 50 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। उधर, काम कर रही एजेंसी का भी कोई अता-पता नहीं है।
परेशानी की बात यह है कि नए सत्र में कई छात्रों को हॉस्टल में दाखिले नहीं मिल पाए हैं। 5 वे और 6 वे सेमेस्टर के कई छात्र इसी उम्मीद में थे कि उन्हें कोर्स पूरा होने तक इनमें शिफ्ट कर दिया जाएगा, लेकिन हॉस्टल तैयार न होने के कारण अब इन्हें कराए के मकानों में रहना पड़ रहा है। एेसा इसलिए क्योंकि पुराने हॉस्टलों में इस बार नए छात्रों को पहले प्रवेश दिया गया है।
एचएससीएल कंपनी को दिया गया था
विवि में न्यू बॉयज हॉस्टल के निर्माण का काम भारत सरकार के उपक्रम एचएससीएल को दिया गया था। विवि प्रशासन ने 90 फीसदी भुगतान भी कर दिया है। जानकारी के अनुसार हॉस्टल का निर्माण तीन चरणों में होना था। 24 करोड़ रुपए की राशि अब तक विवि प्रशासन एचएससीएल को दे भी चुकी है, लेकिन बावजूद इसके कंपनी ने छह महीने से यह काम बंद रखे हुए हैं। विवि प्रशासन की परेशानी यह है कि वह सीधे तौर पर कंपनी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।
500 छात्रों के लिए तैयार होना है कमरे
हॉस्टल की आधार शिला पूर्व कुलपति प्रो. एनएस गजभीए ने रखी थी। हालांकि उनके जाने के बाद विवि में काफी उठा पटक हुई थी। इस वजह से विवि में कई निर्माण कार्य अभी तक मूल रूप नहीं ले पाए हैं। जानकारी के अनुसार न्यू हॉस्टल में ५०० कमरे तैयार किए जाना है। इनमें से दो सौ कमरे ही बन पाए हैं। हालांकि इन कमरों में अभी भी काम बचा है। सूत्रों की मानें तो विवि प्रशासन ने एचएससीएल को टर्मिनेट कर दिया है। अब इस काम का जिम्मा सीपीडब्ल्यू को दिया है। उधर, शासन स्तर पर भी पत्राचार किए जा रहे हैं।
जिन्हें फील्ड का ज्ञान नहीं उन्हें बनाया जीएम
इस कंपनी ने निर्माण की देखरेख के लिए एक रिटायर्ड अधिकारी की पोस्टिंग जनरल मैनेजर के पद पर की है, लेकिन उन्हें कंस्ट्रक्शन वर्क का कोई भी आइडिया नहीं है। करोड़ों के इस काम में कहां गड़बड़ी हो रही है उसके बारे में भी मैनेजर को कोई जानकारी नहीं है। एेसे में अब तक जितना भी काम हुआ है वह भगवान भरोसे ही था।
Published on:
27 Aug 2018 05:08 pm
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