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ई हॉस्पिटल के मायने नहीं समझ पा रहे मरीज, पुराने मरीज बनवा रहे न्यू यूनिक आइडी

-प्रचार प्रसार के लिए जिला अस्पताल और बीएमसी प्रबंधन ने नहीं लगवाए बोर्ड, काउंटर पर भी कर्मचारी नहीं पूछ रहे आइडी

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सागर

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Aakash Tiwari

Jan 07, 2019

ई हॉस्पिटल के मायने नहीं समझ पा रहे मरीज, पुराने मरीज बनवा रहे न्यू यूनिक आइडी

ई हॉस्पिटल के मायने नहीं समझ पा रहे मरीज, पुराने मरीज बनवा रहे न्यू यूनिक आइडी

सागर. बीएमसी और जिला अस्पताल ई हॉस्पिटल दर्जा प्राप्त है। लेकिन मरीज इसके मायने नहीं समझ पा रहे हैं। दोनों जगहों पर पुराने मरीज यूनिक आइडी नंबर का उपयोग नहीं कर रहे हैं। बीएमसी में हर रोज औसतन १२ सौ से ज्यादा मरीज उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। वहीं, जिला अस्पताल में ३०० मरीजों का प्रतिदिन उपचार हो रहा है। दोनों संस्थानों में नाम मात्र के पुराने मरीज ही यूनिक आइडी नंबर का उपयोग कर रहे हैं। एेसे में सवाल उठता है कि एेसा क्यों? क्या प्रबंधन मरीजों को जागरुक करने में रुचि नहीं दिखा रहा है। या फिर पर्ची काउंटर पर कर्मचारी मरीजों से इस बारे में कोई बात नहीं कर रहे हैं। वजह कुछ भी हो, लेकिन इससे ई-हॉस्पिटल की मंशा पर पानी फिर रहा है।

-अगस्त में बना था ई-हॉस्पिटल

जानकारी के अनुसार ज्यादातर लोग नंबर नहीं बता रहे हैं, जिससे हर बार उनकी नई आईडी बन रही है। जिला अस्पताल की बात करें तो अगस्त महींने में ई-हॉस्पिटल सॉफ्टवेयर लागू हुआ था, जिसके बाद से जिला अस्पताल में आने वाले हर मरीज का यूनिक आईडी बन रहा है। इसका फायदा यह है कि मरीज भविष्य में किसी दूसरे अस्पताल भी जाए तो उस आईडी नंबर से पुराना रिकॉर्ड मिल सकता है। लेकिन ओपीडी पर्ची बनवाते समय मरीज अपनी यूनिक आईडी नहीं बताते, जिसके कारण हर बार उनकी नई आईडी जनरेट होती है और इस योजना का लाभ मरीजों को नहीं मिल पाता।

-अस्पतालों में लगेंगे बोर्ड

मरीजों को जागरुक करने के लिए अब दोनों संस्थानों में सूचना पटल लगवाए जाएंगे। साथ ही डाटा एंट्री वाले स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाएगी। ई मॉड्यूल की तैयारी की जा रही है। ओपीडी की समस्या को जल्द सुधरवाया जाएगा। वैसे मरीज के नाम से उसका ट्रैक रिकॉर्ड निकाल सकते हैं।

-ई-लैब के जरिए पहुंचेगी मरीजों की रिपोर्ट

बीएमसी और जिला अस्पताल में लैब को ई-लैब बनाने की कवायद शुरू हो रही है। अस्पताल प्रशासन ने लैब माड्यूल तैयार किया है। ई-लैब तैयार होते ही मरीज की रिपोर्ट डॉक्टरों तक सीधे पहुंचा दी जाएगी। जिला अस्पताल और बीएमसी की सेंट्रल लैब में हीमोग्लोबिन, यूरीन, शुगर, यूरीन प्रेग्नेंसी, मलेरिया एंटीजन, स्लाइड कलेक्शन, हीमोग्लोबिन, एचआईवी, सीरम कॉलेस्ट्रॉल, ईएसआर, प्लेटलेट काउंट, थायराइड सहित कई जांचे होती हैं।

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