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किसान का कमाल, प्लास्टिक की बॉटल्स से पानी देकर बचा रहे पेड़-पौधे

फलदार पेड़-पौधे गर्मी के कारण सूखने लगे, प्रशासन ने खनन पर रोक लगा दी तो किसान ने पड़ोसियों से वेस्टेज प्लास्टिक की बॉटल्स इकट्ठी कर उन्हीं से सिचाई शुरू कर दी। इससे जहां पेड़-पौधे सुरक्षित हुए वहीं पानी भी बर्बाद होने से बच गया

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Widush Mishra

Jun 12, 2016

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सागर.कहते हैं कोई भी काम अगर योजना बनाकर और सूझबूझ से की जाए तो सफलता आप के कदम चूमती है। 50 डिग्री के पास पहुंचे तापमान व सूखे के हालात में जहा इंसानी जिंदगी पानी की एक बून्द के लिए तरस रही है वहीं सागर के एक जागरुक किसान ने बड़ी सूझबूझ से अपने सैकड़ों फलदार पेड़-पौधों को ना सिर्फ जिंदगी दी बल्कि जितना पानी उन्हें मिलना था उतना पानी दिया ।

वॉटल से पिलाया पानी
गर्मी की मार झेल रहे पेड़-पौधों पर पानी की बॉटल बांंधकर उन्हें पानी देने का अद्भुत तरीका सागर के एक किसान ने खोजा है। वेस्टेज बॉटल पेड़ों पर बांधकर इसके डॉट में एक छेद के साथ एक बाती डाली गई जो पौधों को पानी की एक एक बूंद से जिंदगी दे रही है।

पेड़ों को जिंदगी देने की ठानी
दरअसल सागर के मकरोनिया इलाके के रहने वाले समीर मिश्रा की पैतृक जमीन पथरिया जाट में हैं जहां उन्होंने अपनी जमीन पर इस बार फलदार पेड़-पौधे की खेती करने की सोची। उन्होंने इसके लिए अपने सूखे कुंए और नलकूप को गहरा करना चाहा लेकिन प्रशासन ने रोक लगा दी। समीर ने प्रशासन की इस रोक के बाद अपनी फलदार पेड़ों को जिंदगी देने की ठानी। उन्होंने अपने मोहल्ले और आस पास पड़ोस से पानी की वेस्टेज बॉटल की और इनमें पानी भरकर पेड़ पौधों की टहनियों से बाँध दिया। बॉटल की डॉट में एक छेद कर उसमे एक बाती भी डाली जिससे इन पेड़-पौधों को जरूरत भरा पानी मिलता रहा और इस भीषण गर्मी में भी हरे भरे रहे।

सूझबूझ के साथ की खेती
किसानो को विपरीत परिस्थितियों में हार ना मानकर सूझबूझ से खेती करना चाहिए। ऐसी स्थिति में हर उस चीज़ पर ध्यान देना चाहिए जिसे लोग अनुपयोगी मानकर फेक देते है। कभी कभी यही चीजें हमारे लिए उपयोगी साबित होती है। मैंने वेस्टेज बॉटल्स उपयोग कर अपनी सूखी खेती को हरा भरा कर लिया। मुझे एक माह में तीस टेंकरों से इन पेड़ पौधों की सिचाई करनी पड़ती थी। अब सिर्फ एक या दो टेंकरों से सिचाई हो जाती है।
समीर मिश्रा, किसान

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