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बढ़ते अपराध पर एएसपी अजाक का रोचक तर्क, जानिए क्या है उनके विचार

दलित आदिवासियों पर अपराध दो साल में ही हो गए 200 के पार, ये कैसा सशक्तिकरण?

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सागर

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Sanjay Sharma

Dec 16, 2017

Graph of growing crime on tribals in Madhya Pradesh latest Report 2018

Graph of growing crime on tribals in Madhya Pradesh latest Report 2018

सागर. जिले में दलित-आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अपराध और शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वंचित वर्ग को कानूनी संरक्षण और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई के निर्देश के बाद भी इन वर्गों के विरुद्ध अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

मामले में जब एएसपी अजाक से बात की जाती है तो बढ़ते अपराध पर उनका सफाई देने का अंदाज कुछ निराला ही नजर आता है। एएसपी पीएल कुर्वे के अनुसार अपराध इसीलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि प्रावधानों में संशोधन और लगातार जागरुकता के कार्यक्रम चल रहे है। ऐसे में लोग जागरुक होकर थाने में शिकायत करने पहुंचने लगे है। जिससे अपराध का आंकड़ा दोगुना हो गया है। इनके इस तर्क का मतलब स्पष्ट है कि सरकार जागरुकता के कार्यक्रम बंद करा दें,नहीं तो अपराध का ग्राफ ऐसे ही बढ़ता जाएगा।
वर्ष २०१७ में जिले में दलित-आदिवासी वर्ग के विरुद्ध हुए अपराधों की संख्या ४५० से ज्यादा है जबकि दो साल पहले यह १९८ ही थी। एेसे में एक साल के अंतराल में दलित-आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में २ गुना इजाफा हुआ है जो वंचित वर्ग के सशक्तिकरण के प्रयासों के बीच चिंता का विषय है।
वैमनस्य से बढ़ रहे अपराध
दलित-आदिवासियों के खिलाफ बढ़े अपराधों में सबसे ज्यादा संख्या मारपीट, छेड़छाड़ व दुव्र्यवहार संबंधी प्रकरणों की है। आपसी विवाद के चलते दर्ज कराए जाने इन प्रकरणों में इजाफे की एक वजह एससी/एसटी एक्ट के कुछ प्रावधानों में हुए संशोधन को भी बताया जा रहा है। क्योंकि पहले सामान्य मारपीट में एससी/ एसटी कार्रवाई नहीं की जाती थी।
मारपीट के मामले दोगुने
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष २०१७ में नवंबर तक जिले में अजाक वर्ग के विरुद्ध दर्ज अपराधों की संख्या ४२२ से ज्यादा थी। इनमें भी मारपीट संबंधी अपराधों की संख्या ज्यादा २७० है। जबकि छेड़छाड़ संबंधी अपराधों की संख्या ८० के करीब है। मारपीट के प्रकरण वर्ष 2016 में 145 दर्ज हुए थे जो कि इस साल से करीब आधे ही हैं।
100 से ज्यादा केस लंबित
एससी/ एसटी वर्ग के खिलाफ हुए अपराधों की विवेचना सात दिन की समयावधि में शुरू कर चालान कोर्ट में पेश करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य कम समय में वंचित वर्ग के पीडि़तों को न्याय दिलाना है लेकिन पुलिस में अधिकारियों की कमी के कारण विवेचना अधूरी होने से जिले में १०० से ज्यादा अपराध अटके हुए हैं।
प्रावधानों के संशोधन और लगातार जागरुकता कार्यक्रमों के चलते लोग शिकायतें लेकर थाने पहुंचने लगे हैं। इसी के चलते दर्ज अपराधों की संख्या में वृद्धि हुई है।
पीएल कुर्वे, एएसपी (अजाक) सागर

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