बीना.उन्होंने कहा कि जब किसान हक की मांग करते हैं तो गृहमंत्री उनकी छाती पर गोली मारते हैं। वह लोगों की हत्या करवाने का काम कर रहे हैं। राहुल गांधी किसानों लड़ाई की लड़ते हैं कॉमेडी नहीं करते। कॉमेडी तो गृहमंत्री करते हैं और ऐसे गृहमंत्री के पद रहने का अधिकारी नहीं हैं। जिनके राज में कहीं न कहीं किसानों की सीधी हत्या की गई हो। ये जनरल डायर के रूप में कुछ भी कर लें जनता इन्हें जवाब देगी। जब किसानों की हत्या करते हो तो एक-एक करोड़ का मुआवजा दिया जाता है। विधानसभा के आंकड़ों के अनुसार पिछले दस साल में 18 हजार से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है, उन्हें 20-20 लाख का मुआवजा दिया जाए और परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। क्योंकि आत्महत्या सरकार की गलत नीतियों के कारण की है। सरकार इनको मुआवजा देने की बजाय यह बताने पर तुली है कि वह भूत-प्रेत से मरे हैं, घर की परेशानियों से मरे हैं। किसानों का कर्जा माफकरें, मुआवजा दें और यह नहीं कर सकते तो ऐसी सरकार को रहने का अधिकार नहीं है। गरीबों के नाम काटने का काम सरकार कर रही है। गरीबों का राशन दिया जाए यह हमारी मांग हैऔर इसके लिए लड़ाई जारी रहेगी। कार्यक्रम को पूर्व मंत्री प्रभु सिंह ठाकुर, अरूणोदय चौबे, वीरसिंह यादव, निर्मला सप्रे, इंदर सिंह आदि ने संबोधित कर प्रदेश सरकार को किसान विरोधी बताया। इस अवसर पर संजय ठाकुर, महेन्द्र सिंह, वासु यादव, अभिषेक बिलगैंया, सौरभ आचवल, स्वप्निल माथुर, आशीष चौबे, अनुराग ठाकुर, श्याम व्यास आदि उपस्थित थे।