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अपार धन प्राप्ति के 14 सरलतम उपाय, अवश्य आजमाएं …

अपार धन प्राप्ति के 14 सरलतम उपाय, अवश्य आजमाएं ...

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सागर

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Samved Jain

Apr 06, 2018

dhan prapti ke upay

जीवन में हर व्यक्ति की चाहत होती है कि वह अधिक से अधिक धन प्राप्त कर सुखी जीवन जीये। लेकिन, कुछ को छोड़कर सभी की यह मनोकामना पूरी नहीं हो पाती है। ऐसा नहीं है कि ऐसे लोगों की मेहनत में कमी होती है, लेकिन अपार धन कैसे प्राप्त होता है इसकी जानकारी इन्हें नहीं होती है। यह कहना है दमोह के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित मणिशंकर मिश्रा का। आपने पत्रिका से चर्चा के दौरान यह बात कही। ज्योतिषचार्य मिश्रा ने पत्रिका के पाठकों के सवाल कैसे करें पूजा पर चर्चा शुरू की थी, जिसका सार अपार धनप्राप्ति के जुड़ा हुआ निकला। जिसे उन्होंने विस्तार से समझाया।

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सागर. पंडित मणिशंकर मिश्रा ने बताया कि अपार धन, सुख समृद्धि प्राप्ति के लिए सबसे पहले इंसान को पूजा के नियमों को जानना होगा। ज्योतिष और वास्तु का समझना होगा। अगर व्यक्ति भगवान के पूजन, ज्योतिष और वास्तु को समझकर सही तरीके से उपयोग करना लगता है तो निश्चित ही उसे अपार धन प्राप्ति से कोई नहीं रोक सकता है। मनुष्य के जीवन में धन के रास्ते सदैव खुले रहते है, लेकिन धन को कैसे सहेजा जाए यह उसे नहीं आता है। इसके लिए जरूरत है सही उपाय की। उन्होंने धन प्राप्ति के लिए ऐसे १४ उपायों का जिक्र किया है, जिसका पालन कर अपार धन प्राप्ति की जा सकती है।

सबसे पहले समझ लो पूजा के नियम


धन को पाना है तो ईश्वर से मित्र की तरह लगाव होना आवश्यक है। ऐसे में पूजा करने के नियमों को जानना बहुत आवश्यक है। पंडित मिश्रा के अनुसार वैसे तो पूजा करने के काफी कठोर नियम है, लेकिन भाव है तो इसे सहजता से किया जा सकता है। पूजा के ११ नियमों का उन्होंने जिक्र किया है, जिनमें से ६ पर मन लगाकर आराधना करने का आग्रह किया है। ऐसा करने पर मां महालक्ष्मी प्रसन्न होती है और अपार धन की प्राप्ति होती है।

ऐसे सरल बनाए अपना धन प्राप्ति का लक्ष्य


ज्योतिषाचार्य के अनुसार अगर आप सदैव की तरह बताए जाने वाले १४ नियमों को पालन करते आ रहे हैं तो आपके अपार धन प्राप्ति के द्वार हमेशा खुले रहेंगे। इन उपायों को आप नीचे विस्तृत रूप से भी पढ़ सकते हैं। इसके अलावा भी आप इन उपायों को सरल बनाना चाहते हैं तो मेहनत के साथ-साथ दान में भी आगे आएं। इसके अलावा मानव सेवा से भी धन की प्राप्ति अधिक होती है।

यहां पढ़ें नियम 01 से 03


हम आपकों सभी १४ नियमों से अवगत कराएंगे, लेकिन सबसे पहले पढ़े तीन नियमों को जिसका सबसे ज्यादा महत्व बताया गया है। पहले नियम के तहत लक्ष्मीजी के किसी भी मंत्र का जप बुधवार या शुक्रवार से शुरू करें और नित्य कमल गट्टे की एक माला 108 बार जाप करें। दूसरा नियम विष्णु सहस्रनाम और श्रीसूक्त का एक-एक पाठ नियमित करें। इसके अलावा श्री लक्ष्मीजी को गुलाब या कमल पुष्प चढ़ाएं। तीसरा नियम बहुत की सरल है। जिसमें आपको अपने वरिष्ठ व्यक्तियों का सम्मान करना है। घर-परिवार में सबसे प्रेम-व्यवहार करना है।

चौथा, पांचवा और छटवा नियम हैं आपसे जुड़ा

चौथे नियम जानने के बाद तय है आप इसे आज से करना शुरू कर देंगे। नियम के तहत आपको सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करना है।इसके बाद स्नानादि कर अपना पूजन-जप इत्यादि कर दिन की शुरुआत करना है। जहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सोते है, वहां धन नहीं आता। पांचवा नियम दान से जुड़ा है। इसके तहत हमें गाय-कुत्ता, भिखारी को यथासंभव खाना इत्यादि देना है। न दे सकें तो भी उन्हें दुत्कारें नहीं। छटवें नियम के तहत घर में कूड़ा-करकट, अटाला इत्यादि जमा न होने दें। समय-समय पर सफाई करें।

सातवां, आठवां और नौंवा नियम है घर से जुड़ा

सातवां नियम कहता है कि शाम के बाद झाड़ू-बुहारी न करें। यदि करें तो कचरा घर के बाहर न फेकें। आठवां नियम भी इससे ही जुड़ा हुआ है। जो कहता है कि झाडू संभालकर रखें और खड़ी न रखें। ऐसी रखें कि किसी की नजर उस पर न पड़े। झाड़ू को कभी उलांघें नहीं, न ही पैर की ठोकर लगे। अगर ऐसा होता है तो नुकसान होता है। इन छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। नौंवा नियम कहता है कि कपड़े स्वच्छ व धुले हुए हों। इत्र-सेंट का प्रयोग करें।

दसवां, ग्यारहवां और बारहवां नियम बदलेगा दशा

दसवां नियम कहता है कि पूजन यदि नित्य करते हैं तो समय व स्थान निश्चित रखें। 10-15 मिनट से ज्यादा का फर्क न हो। ऐसा होने पर देवता शाप दे देते हैं। ग्वारहवां नियम आप सभी जानते ही होंगे। जो है ईशान दिशा में गंदगी न होने दें। जबकि बारहवां नियम घर-दुकान-फैक्टरी आदि में उत्तर, पूर्व, ईशान खुली हो तथा इन दिशाओं में सुगंधित पुष्प वाले तथा तुलसी के पौधे लगाने का है। इससे हमें अधिक लाभ होता है।

तेरहवां और चौदहवां नियम मिटाता है दोष


तेरहवां नियम कहता है कि दक्षिण-नैऋत्य, पश्चिम में कोई गड्ढा, बोरिंग, हौज इत्यादि न हो तथा जहां भी वास्तुदोष हो, वहां एक स्वस्तिक बना दें। हमेशा बाथरूम में नल इत्यादि से पानी न टपके, ध्यान रखें। जबकि अंतिम और चौदहवां नियम कहता है कि हमें अपने ईष्टदेव का पूजन पूरे मन भाव लगन से करना चाहिए। इसमें किसी भी तरह कमी नहीं होना चाहिए। इस तरह अगर हम इन सरलतम १४ उपायों का पालन करते हैं तो अपार धन प्राप्ति की संभावना अधिक होती है।
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