
पिता की तरह बड़े भाई ने निभाया अपना रिश्ता, छोटे के लिए छंोड़ी नौकरी
सागर. भाई-भाई का रिश्ता दुनिया का सबसे प्यारा और अनोखा रिश्ता होता है। इसमें एक-दूसरे के लिए प्यार भी होता है तो नोंकझोंक और गुस्सा भी। परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, यह प्यार और खट्टी-मीठी नोंकझोक में कोई बदलाव नहीं आता। बड़ा भाई अपने छोटे भाई-बहनों का साथ हर बुरी परिस्थितियों में देता है। आज ब्रदर्स डे है। ऐसा दिन जोकि भाई-बहनों को समर्पित है। आज हम शहर की उन भाइयों के बारे में बात करेंगे जो हर परिस्थिति में अपने भाई-बहन के साथ खड़े हैं और आगे भी खड़े रहेंगे।
इसलिए मनाते हैं यह दिवस
२४ मई को भाइयों के सम्मान में यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन उन भाइयों के बंधन का जश्न मनाया जाता है जो कई लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिन लोगों के भाई हैं, वे उन सभी भाइयों के लिए धन्यवाद करते हैं जो उन्होंने किए हैं। लोग इस दिन अपने भाइयों के लिए उपहार खरीदते हैं।
भाई के लिए छग से नौकरी छोड़ सागर आए
डॉ. आशीष तिवारी इन दिनों इंदौर के लिए आर्युवेदिक मेडिकल में सह प्राध्यापक के पद पर हैं। तिवारी सागर के ही रहने वाले हैं। इनकी सफलता का श्रेय वे अपने बड़े भाई को देते हैं। तिवारी ने बताया कि जब २००८ में पिताजी शांत हुए तो परिवार बिखर गया था। लेकिन बड़े भाई मनीष तिवारी ने हिम्मत दिखाई। उस समय वे छत्तीसगढ़ में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे और पैकेज भी अच्छा था। लेकिन वे परिवार के लिए नौकरी छोड़कर सागर आ गए है। और भी छोटा सा बिजनेस कर रहे हैं। हमारे लिए भाई ने अपने फ्यूचर को भी महत्व नहीं दिया।
स्वयं छोटे भाइ-बहनों के पिता बन
शहर में बड़ा बाजार निवासी लक्ष्मीकांत शर्मा इन दिनों एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। शर्मा एमए और बीएससी हैं। पिताजी के इस दुनियां में नहीं रहने के बाद यह स्वयं छोटे भाइ-बहनों के पिता बने, पिता की तरह उनकी नौकरी और विवाह का ध्यान रखा। शर्मा के पिता नगर निगम थे, और बड़े भाई के हक से पिता की नौकरी उन्हें ही मिलनी। जब पिता इस दुनियां में नहीं रहे तब छोटा भाई रमाकांत पढ़ाई करता था, लेकिन छोटे भाई के लिए अपनी नौकरी दी और स्वंय एक निजी कंपनी में काम कर रहे हैं। शर्मा की दो बहने भी हैं जिनकी शादी इन्होंने कराई और अभ वे सुखी परिवार में हैं।
Published on:
24 May 2019 09:00 am
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