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पांच सौ से ज्यादा लोगों को चूना लगाकर भागी एलजेसीसी सोसायटी

अब रुपए दिलाने की मांग को लेकर शिकायत करने पहुंचे लोग

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LJCC society ran away after defrauding more than five hundred people

तहसील शिकायत करने पहुंचे लोग

बीना. इन दिनों जगह-जगह बैंक के नाम पर कई सोसायटी लोगों से रुपए जमा कराके उन्हें अच्छा खासा ब्याज देने का वादा करके उन्हें ठगने का काम कर रही है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां पर एक एलजेसीसी नाम की सोसायटी करीब पांच सौ से ज्यादा लोगों के दो करोड़ से ज्यादा रुपए ठगकर चंपत हो गई, इसकी शिकायत लेकर सोमवार को कुछ लोग तहसील पहुंचे, जिनकी मैच्युरिटी पूरी होने के बाद भी रुपए नहीं मिले है, क्योंकि रुपए जमा करने वाली सोसायटी मौके से भाग गई है।
जानकारी के अनुसार एक एलजेसीसी नाम की सोसायटी बीना में वर्ष 2012 से काम कर रही थी, जो पहले विवेकानंद कॉपरेटिव सोसायटी के नाम से संचालित होती थी। इसके बाद उसका नाम एलजेसीसी हो गया, इसमें करीब बीस से ज्यादा एजेंट काम कर रहे थे, जिन्होंने पांच सौ से ज्यादा लोगों के खाते खोले। जमा राशि पर सोसायटी अच्छा खासा ब्याज देती थी, जिससे लोभ में आकर लोगों ने ज्यादा रुपए जमा करना शुरू कर दिए थे और सोसायटी वहां से भाग गई। नशीद अली ने बताया कि उनके 36 हजार रुपए सोसायटी में जमा है, जो बंद होने से रुपए नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोसायटी के अधिकारी बिना बताए ही यहां से भाग गए हैं। इसके अलावा योगेश अहिरवार के भी सोसायटी में 38 हजार रुपए जमा है। इस शाखा की ठगी का शिकार उसका एजेंट भी हो गया है, जिसमें एजेंट गिरीश सोनकर के करीब तीन लाख रुपए जमा थे। लोगों ने बताया कि यह शाखा करीब पांच सौ से ज्यादा लोगों के दो करोड़ रुपए से ज्यादा लेकर भाग गई है।

देते थे चार प्रतिशत कमीशन
एजेंट ने बताया कि सोसायटी में खाता खुलवाने से लेकर हर माह उपभोक्ता जो रुपए जमा करता था, उसपर भी चार प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। बेरोजगारी के इस दौर में सोसायटी से अच्छा कमीशन मिल जाता था, जिससे लोगों के खाते खुलवाए थे।

मैच्युरिटी पूरी होने पर गए थे रुपए लेने तो बंद मिली शाखा
वर्ष 2018 से इस एलजेसीसी सोसायटी में रुपए जमा करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके 45 हजार रुपए जमा थे, लेकिन शाखा बंद होने से उनके रुपए नहीं मिले हैं। कंपनी कहां से संचालित हो रही इसकी जानकारी भी नहीं लग रही है।
अमजद अली, पीड़ित

हर बीस किलोमीटर में खुली थी ब्रांच
हर बीस किलोमीटर में इसकी शाखाएं खुली थी, जिनमें खिमलासा, कुरवाई, बीना, मुंगावली सभी शाखा बंद हो चुकी हैं। मेरे पिता के नाम पर 71 हजार रुपए जमा है, जो सोसायटी लेकर भाग गई है।
प्रकाश सेन, पीड़ित