
वैशाख पूर्णिमा पर सप्तनदियों के जल से भगवान शिव हुए जलमग्न, भक्तों ने किए ऑनलाइन दर्शन
सागर.वैशाख और बुद्घ पूर्णिमा एक साथ होने से बुधवार को मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान हुए। शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का पूजन-अभिषेक कर उन्हें जलमग्न किया गया। दो पूर्णिमा एक साथ होने पर भक्तों ने व्रत रखकर दान भी किया। पूर्णिमा पर सुबह मंदिरों में भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक हुआ और उसके बाद उन्हें जलमग्न किया गया। कहते हैं कि भगवान भोलेनाथ ने जो हलाहल विष पिया था उससे ठंडक दिलाने और इस भीषण गर्मी से निजात दिलाने के लिए वैसाख मास की पूर्णिमा में उन्हें जलमग्न किया जाता है।
भूतेश्वर मंदिर में सुबह से भगवान का विशेष अभिषेक हुआ उसके बाद भगवान को जलमग्न किया गया। भगवान को दूसरे दिन गुरुवार को सुबह 4 बजे निकाला जाएगा। पंडित मनोज तिवारी ने बताया कि कोविड 19 की वजह से इस वर्ष भण्डारे का आयोजन नहीं हुआ। भक्तों को सोशल मीडिया के माध्यम से दर्शन कराए गए। भक्तों ने वाट्सएप और फेसबुक पेज पर मंदिर की फोटो शेयर की।
सुबह अभिषेक, शाम को शिवजी जलमग्न
गौरीशंकर मंदिर के पुजारी पं. श्रवण कुमार मिश्र के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिवजी ने विष को पिया था जिस कारण उनका पूरा शरीर नीला पड़ गया था। गर्मी के माह में शिवजी को ठंडक मिल सके इसलिए भक्तों द्वारा शिवजी की पिंडी को जलमग्न किया जाता है। वैसे पूरे वैशाख माह में भक्तों द्वारा शिवजी की आराधना की गई, लेकिन वैशाख पूर्णिमा पर भक्तों ने व्रत रखकर शिवजी की उपासना की। शहर के गौरीशंकर मंदिर, नागेश्वर मंदिर, नीलकंठ, गुप्तेश्वर और भूतेश्वर मंदिर में कुछ भक्त दर्शनों के लिए भी पहुंच गए और शिवजी को भोग लगाया।
Published on:
26 May 2021 08:22 pm
बड़ी खबरें
View Allसागर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
