
तारकरली बीच के किनारे की सफेद रेत और पारदर्शी पानी अलग सुंदरता प्रदर्शित करते हैं,गणपतिपुले में विराजमान हैं स्वयंभू गणेश भगवान,सिंधुदुर्ग: भारत का प्रवेश द्वार,रत्नागिरी का थीबू महल जिसमें वर्मा के निर्वासित राजा को रखा गया था।
कोंकण में महाराष्ट्र और गोवा के तटीय जिले आते हैं। इसलिए कोंकण खूबसूरत बीच, द्वीप के चलते मजेदार टूरिस्ट एरिया है। यहां की हरियाली, गहरी घाटियां, वॉटरफॉल्स मन को मोह लेते हैं। सर्दियों में और गर्मियों में जहां समुद्री बीच बड़े आकर्षण का केंद्र होते हैं। वहीं मानसून में यहां का नजारा वर्षा वन जैसा होता है। पहाडिय़ों की घुमावदार सड़कें एक अलग तरह का आनंद देती हैं। वाटर स्पोट्र्स की एक्टिविटीज रोमांचित करती हैं। जिनका आप कभी भी आकर मजा ले सकते हैं।
समुद्र के रहस्य से परिचय कराता तारकरली
अरब सागर के तट पर स्थित तारकरली प्राकृतिक सौंदर्य को अपने में समेटे हुए है। सघन वन और उनके किनारे के बीच लोगों को लुभाते हैं। यह छोटा सा गांव है जो समुद्र के साफ पानी और सफेद रेत के लिए प्रसिद्ध है। बोटिंग के साथ यहां चलने वाली स्कूबा डाइविंग की एक्टिविटी के जरिए समुद्र के रहस्य के बारे में जाने का मौका मिलता है। 12 से 15 मीटर की गहराई में जाकर साफ पानी से समुद्री जीवों और चट्टानों को झांकना रोमांचित कर देता है। इस बस्ती के दक्षिण में घने जंगल से घिरी तारकरली नदी बहती है। जिसके बैकवाटर की शांति का आनंद लेने के लिए नदी में बोटिंग का भी आनंद ले सकते हैं।
गणपतिपुले: स्वयंभू सिद्धविनायक
महाराष्ट्र के सफेद रेतीले समुद्र तटों के बीच बसा गणपतिपुले प्राकृतिक सौंदर्य से ओत-प्रोत है। यहां विराजे स्वयंभू भगवान गणेश एक अलौकिक आनंद देते हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं में भी इसका विशेष स्थान है। सिद्धविनायक की प्रतिमा यहां कैसे विराजित हुई यह किसी को नहीं पता। इसलिए इनकी ख्याति स्वयं प्रकट होने वाले देवता के रूप में है। 400 साल पहले एक ग्रामीण की वजह से यह दुनिया के सामने आया। यहां बना मंदिर अद्वितीय है और संरक्षण और संधारण ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है। गणपतिपुले रत्नागिरी से 25 किमी दूर और महाराष्ट्र के कोंकण तट के पास स्थित है। गणपतिपुले की सुंदरता भगवान गणेश की लोककथाओं में महत्वपूर्ण रूप से निवास करती है। समुद्र तट से घिरी यहां की पहाड़ी ऐसा आभास कराती है जैसे वह गणेश भगवान की आकार की हो, इसीलिए मंदिर की प्रदिक्षणा की जाती है। नौकायन और समुद्र की लहरों से हिलोरें लेते सुंदर बीच एक अलग तरह का आनंद का अनुभव कराते हैं। महाराष्ट्र टूरिज्म डेवलपमेंट कार्पोरेशन की वाटर स्पोट्र्स की एक्टिीविटी भी बड़ा आकर्षण का केंद्र है।
सिंधुदुर्ग: महाराष्ट्र का पहरेदार
उत्तर में रत्नागिरी जिले, दक्षिण में गोवा, पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में सह्याद्री रेंज के शिखर से घिरा सिंधुदुर्ग ऐतिहासिक शहर है। सिंधुदुर्ग विदेशी समुद्र तटों और शाही किलों से बना है। सदियों तक विदेशी आक्रांताओं से महाराष्ट्र भर ही नहीं बल्कि भारत को बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले सिंधुदुर्ग किले का सुनहरा अतीत महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ा हुआ है। जिन्होंने चट्टानी द्वीप में इस किले निर्माण कराया। यह भारत के उन अद्वितीय किलों में शुमार है जो कभी जीता नहीं गया। इसके अलावा, खूबसूरत मांगेली जलप्रपात, नापने जलप्रपात, शिवपुर जलप्रपात आदि जगह प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं। सिंधुदुर्ग में घूमने के लिए बहुत कुछ है, शहर में कई समुद्र तट हैं, जैसे तारकरली समुद्र तट, निवती समुद्र तट, आदि जहां नैसर्गिक आनंद की अनुभूति कर सकते हैं।
विरासत का शहर रत्नागिरी
महाराष्ट्र का बंदरगाह शहर होने के लिए प्रसिद्ध, रत्नागिरी शहर अरब सागर के तट पर स्थित है। यह स्थान महाराष्ट्र के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है। दूसरी तरफ सह्याद्री रेंज होने के कारण, यह शहर प्रकृति से भरा हुआ है। तट पर स्थित होने के कारण, बीच, बंदरगाह और लाइटहाउस जैसी जगहें इस शहर की सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं। रत्नागिरी ऐसे कई स्थानों से युक्त है, जो पूरी तरह से चित्रमय हैं और ऐसे आदर्श स्थान होने चाहिए जहाँ लोग प्रकृति का सर्वोत्तम आनंद ले सकें। जयगढ़ किला जैसे प्राचीन किले हों या भारत के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित स्थान जैसे तिलक अली संग्रहालय, रत्नागिरी दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए उपयुक्त कई स्थानों से भरा हुआ है। वर्मा के राजा के निर्वासन के दौरान रहने के लिए बनाया गया महल अब म्यूजियम है। आम, काजू और बादाम के बागान भी यहां की सुंदरता को बढ़ा देते हैं।
Published on:
26 Mar 2022 11:31 pm
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