सागर. अरिहंत, सिद्ध, आचार्य एवं उपाध्याय यह चार ही शरण है, चार ही मंगल है। अपने ह्रदय में भगवान को बिठाना बहुत कठिन है, प्रभु की आराधना करने के लिए कई चातुर्मास गुजर जाएंगे। लोग कहते हैं कि हम भगवान की पूजा करते हैं पर वो प्रसन्न नहीं होते, ऐसा क्यों है, भगवान प्रसन्न तब होते हैं जब आप उनकी आज्ञा का पालन करते हो। यह बात निर्यापक मुनि समय सागर महाराज ने कही। अवसर था भाग्योदय तीर्थ में आयोजित धर्मसभा का। मुनि समय सागर ने कहा कि एक छात्र गुरुदेव के पास आकर कहता है कि मैं 18 से 20 घंटे पढ़ाई करता हूं परंतु मेरा मन स्थिर नहीं हो पाता, कृपया उपाय बताएं। गुरुदेव ने कहा मन तो स्थिर ही है, पर हम जो चाहते हैं मन वहां पहुंच जाता है। गुरु प्रसन्न तब होते हैं जब उनकी आज्ञा का अक्षरसा पालन किया जाता है। गुरु की, भगवान की वंदना करना सीखो। हृदय में जब तक गहराई नहीं होगी, कर्म नहीं कटेंगे। भगवान अपनी साधना के माध्यम से ही पूज्य बने हैं।
सागर अपने में सब को समाहित कर लेता है : अजित सागर
मुनि अजित सागर ने कहा कि सागर में गुणधर्म बहुत हैं परंतु दोष एक मात्र ही है सागर का पानी खारा होता है। सागर अपने में सब को समाहित कर लेता है। नदियां अपने साथ कचरा लेकर आती हैं, लेकिन सागर कचरा को स्वीकार नहीं करता, वह कचरे को किनारे पर फेंक देता है। सागर को गंदगी कतई पसंद नहीं है। सागर के खारे पानी की विशेषता यह है कि वह भी मानसून के माध्यम से मीठा पानी प्रदान करता है। आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज की कृपा सागर वालों पर बरसती नहीं, अपितु झड़ी लगी रहती है। कार्यक्रम का संचालन मुकेश जैन ढाना ने किया।
गाजे-बाजों के साथ हुई अगवानीगुरुवार को सुबह मुनि अजित सागर ससंघ की अगवानी भोपाल रोड स्थित मोतीनगर चौराहे के पास हुई। हजारों लोगों ने इसमें पहुंचकर धर्म लाभ लिया। आईटीआई के समक्ष नौ क्षुल्लक महाराजों ने अगवानी की। उसके बाद निर्यापक मुनि समय सागर महाराज ने ससंघ और आर्यिका गुरुमति ने अगवानी की। इस अवसर पर महेश बिलहरा, सागर जैन, देवेंद्र जैना, आनंद स्टील, शैलेंद्र जैन शालू, राजकुमार मिनी, सटटू कर्रापुर, अशोक, मनोज जैन लालो, ऋ षभ बांदरी, प्रियेश जैन, इंद्रकुमार नायक, अरविंद जैन पथरिया, प्रेमचंद उपकार, दिनेश बिलहरा, अरविंद जैन अब्बू, संदीप वैशाखिया, सुरेंद्र डबडेरा, राकेश जौहरी, अभिषेक जैन, राजकुमार टड़ा, चक्रेश पटना आदि मौजूद रहे।