सागर. हाल ही में बने चिकित्सा शिक्षकों के संगठन की चिकित्सा एवं चिकित्सक बचाओ यात्रा शनिवार को सागर पहुंची। यहां बीएमसी परिसर में चिकित्सकों द्वारा यात्रा का स्वागत किया गया। इसके बाद बीएमसी से जिला अस्पताल के बीच बीएमसी के चिकित्सक, विद्यार्थियों और नर्सिंग छात्राओं के साथ रैली निकाली गई। परिसर में सभा का आयोजन भी किया गया जिसमें चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रशासनिक दखलअंदाजी और इससे नए चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता में आ रही गिरावट पर चिंता जताई गई।
मेडिकल टीचर्स ऐसासिएशन एवं मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त आव्हान पर यात्रा प्रदेश के सभी चिकित्सा शिक्षा संस्थानों का भ्रमण कर रही है। इसके माध्यम से शासकीय संस्थाओं में उपचार, मरीजों की परेशानियां, सरकार की चिकित्सा नीति और संस्थाओं की प्रणाली में प्रशासनिक दखलअंदाजी के संबंध में जानकारी जुटाकर ड्राफ्ट तैयार होगा जिसे बाद में सरकार को सौंपकर उसके आधार पर सुझाव दिए जाएंगे। यात्रा में शामिल चिकित्सकों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए पुरानी पेंशन नीति, समय आधारित पदोन्नति व्यवस्था न होने पर भी सवाल खड़े किए। 27 जनवरी को ग्वालियर से शुरू हुई यह यात्रा प्रदेश का भ्रमण कर 7 फरवरी को भोपाल में समाप्त होगी।- सरकार के दावे लेकिन व्यवस्था अब भी संतोषजनक नहीं :-
यात्रा में शामिल चिकित्सकों ने कहा कि मेडिकल कॉलेज जैसे शिक्षण संस्थाओं में सरकारी दखलअंदाजी बढ़ रही है। अधिकारी उपचार संबंधी नीति बना रहे हैं। एमसीआई का एनएमसी में जो रूपांतरण किया गया है वह भी इसी का कारण है। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है ऐसे में भविष्य में अच्छे चिकित्सक मिलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इसका खामियाजा आमजन को ही भुगतना होगा क्योंकि वे ही सरकारी संस्थाओं में उपचार कराने पहुंचते हैं। सरकार का ध्यान केवल नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा, भवनों के निर्माण और उपकरण- सामग्री की खरीदारी पर है। ऐसा क्यों है यह भी सभी जानते हैं, लेकिन इन संस्थाओं में विद्यार्थियों को पढ़ाने योग्य शिक्षक कहां से आएंगे इसकी चिंता नहीं की जा रही।