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बच्चों टाइप इंजीनियरिंग से बनाई मॉडल रोड हो रही गड्ढमगड्ढा

राहगीरों की मानंे तो इस मार्ग से चारपहिया वाहन से गुजरना किसी ऊंट की सवारी करने जैसा हो गया है।

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model road in sagar

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सागर. नगर निगम ने जिस मार्ग को निर्माण के समय शहर की आदर्श सडक़ का दर्जा दिया था, वह अब गड्ढों व गिट्टी में दिख रहा है। बकौली चौराहा बस स्टैंड से गोपालगंज होते हुए आईजी बंगला तक सडक़ पर जगह-जगह गिट्टी ने सीमेंट का साथ छोड़ दिया है। बकौली चौराहा से लाल स्कूल तक सडक़ फिर भी थोड़ी बहुत अच्छी स्थिति में है लेकिन लाल स्कूल से आईजी बंगला तक की सडक़ पूरी तरह से बर्वाद हो गई है। राहगीरों की मानंे तो इस मार्ग से चारपहिया वाहन से गुजरना किसी ऊंट की सवारी करने जैसा हो गया है। जानकारी के मुताबिक यह सडक़ करीब एक करोड़ से ज्यादा की राशि से बनाई गई थी।

जब निर्माण हुआ
गोपालगंज निवासी जगदीश गुप्ता, पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि आदर्श सडक़ का निर्माण जब लाल स्कूल से आईजी बंगला तक हुआ था तभी उखड़ गई थी। इसके बाद निगम ने निर्माण एजेंसी के साथ मिलकर कहीं-कहीं डामर डलवा दिया था।

वर्तमान
आदर्श सडक़ के निर्माण में ही जब घटिया काम दिखने लगा है तो निगम प्रशासन की शहर में जगह-जगह बनाई गई सडक़ों में कैसी गुणवत्ता होगी, इसका अंदाजा लगा सकते हैं। इस सडक़ के दोनों ओर पेवर ब्लॉक भी लगाए गए थे, जो वर्तमान में ठीक स्थिति में कहे जा सकते हैं।

सडक़ बनाई ऐसी, जैसे ऊंट की सवारी
निगम के इंजीनियर्स का कमाल देखना हो तो बाइक से गुजराती बाजार चले जाइए। राधा तिराहा तक जाने वाला मार्ग हर चार फीट के सफर में अपको अपने वाहन की सीट से उचका देता है। मानो आप ऊंट की सवारी कर रहे हों। हालांकि इसके निर्माण को 10 साल से ज्यादा का समय हो गया है। बस स्टैंड के सामने वाली सडक़ भी पूरी तरह से ऊबड़-खाबड़ है। इस पर कई बार डामरीकरण भी किया गया है, लेकिन सडक़ की हालत है कि सुधर ही नहीं पा रही।

बोले लोग
आदर्श सडक़ तो कम से कम एेसी होनी चाहिए कि उसका उदाहरण दे सकें, लेकिन यह सडक़ भी बर्वाद हो गई।
गौरव पांडे, निवासी गोपालगंज

बस स्टैंड के सामने से निकलता हूं तो समझ नहीं आता कि सडक़ को एेसा ऊंचा-नीचा क्यों बनाया है?
प्रिंस तिवारी, निवासी गोपालगंज

मस्जिद से राधा तिराहा तक कार से सफर में लगता है कि नाव से सफर कर रहे हों।
विनय जैन, व्यापारी

एेसा मार्ग जहां ज्यादा चौड़ाई है, वहां सडक़ बनाने मशीनों का उपयोग करना चाहिए था। मशीनों से आदर्श सडक़, गुजराती बाजार, बस स्टैंड वाली सडक़ें बनतीं तो तकनीकी खामियां नहीं आतीं।
अभय दरे, वरिष्ठ सिविल इंजीनियर और महापौर