मानसून आते ही रेत रेत, गिट्टी, सीमेंट और सरिया के दाम आसमान पर, आशियाना बनाना महंगा
शहर में रेलवे स्टेशन माल गोदाम रोड एवं उपनगर मकरोनिया के सिंरोजा रोड पर रेत का थोक व फुटकर कारोबार अधिक होता है। इसके अलावा शहर व उपनगर में जगह-जगह खुले में ढेर लगाकर फुटकर रेत बेची जाती है। के दाम प्रति डंफर पांच से सात हजार रुपए बढ़े
monsoon effect, loose more, money, home, sweet home, development, inflation, sagar hindi news, madhya pradesh news in hindi
सागर.मानसून आते ही रेत के दाम आसमान छूने लगे हैं। एक सप्ताह में ही इसके दाम प्रति डंफर पांच से सात हजार रुपए तक बढ़ गए हैं। इसी तरह अन्य भवन निर्माण सामग्री सीमेंट, लोहा भी महंगा मिल रहा है। जिस कारण लोगों को अपने सपने का घर बनाना भी महंगा साबित हो रहा है। मिस्त्री व मजदूर की मजदूरी भी महंगी है। शहर में रेलवे स्टेशन माल गोदाम रोड एवं उपनगर मकरोनिया के सिंरोजा रोड पर रेत का थोक व फुटकर कारोबार अधिक होता है। इसके अलावा शहर व उपनगर में जगह-जगह खुले में ढेर लगाकर फुटकर रेत बेची जाती है।
माल गोदाम रोड एवं सिंरोजा रोड पर इन दिनों एक डंफर रेत 22 से 27 हजार रुपए तक बिक रही है, जबकि दो सप्ताह पहले ही इनके दाम 15 से 19 हजार रुपए थे। इसी तरह एक ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत 3400 से 3800 रुपए में बिक रही है, जो 2800 से 3200 रुपए में बिकती थी। प्रति हजार ईंट व गिट्टा के दाम भी 300 से 500 रुपए बढ़ गए हैं। इसी तरह सीमेंट के दाम में 5 से 10 रुपए प्रति बोरी बढ़ गए हैं।
वर्तमान में सीमेंट के दाम 290 से 310 रुपए प्रति बोरी है। अप्रैल में भी 20 रुपए से 30 रुपए तक सीमेंट की बोरी महंगी हुई थी। गिट्टी प्रति ट्रैक्टर-ट्रॉली 200-500 रुपए महंगी हो गई है। मकान बनाने वाले मिस्त्री 400-500 रुपए, बेलदार अथवा मजदूर 250 से 280 रुपए मेहनताना ले रहे हैं। इस तरह मकान बनाने के लिए भवन निर्माण साम्रगी व मजदूरी भी महंगी हो गई है।
रजिस्ट्री का बोझ सरिया फिर महंगा
प्रदेश सरकार ने बजट में रजिस्ट्री पर सवा प्रतिशत का बोझ पहले ही डाल दिया है। इसके अलावा एक अप्रैल से ही नई गाइड-लाइन के अनुसार शहर के पांच क्षेत्रों में आठ से दस फीसदी स्टॉम्प शुल्क रजिस्ट्री पर बढ़ाया गया है। जिस कारण लोगों को मकान बनाने के लिए प्लॉट व जमीन के अधिक दाम चुकाना पड़ रहे हैं। अप्रैल में ही सरिया के भाव 1000 रुपए प्रति टन बढ़े थे। फरवरी में इसके भाव 30 से 32 हजार रुपए प्रति टन थे, जो वर्तमान में 32 से 34 हजार हैं।