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तीन किमी पक्की सड़क बनाने की मांग को लेकर पचास से ज्यादा शिकायतें, स्थिति जस की तस

बीना. आगासौद से सेमरखेड़ी स्टेशन तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर सरपंच, जनपद सदस्य और ग्रामीण पचास से ज्यादा शिकायतें जनप्रतिनिधि, अधिकारियों से कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।जानकारी के अनुसार आगासौद से सेमरखेड़ी स्टेशन तक करीब तीन किलोमीटर का रास्ता कच्चा है। इस रास्ते से करीब बारह गांवों […]

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More than 50 complaints have been filed demanding the construction of a three-km concrete road, but the situation remains the same.

सड़क की स्थिति

बीना. आगासौद से सेमरखेड़ी स्टेशन तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर सरपंच, जनपद सदस्य और ग्रामीण पचास से ज्यादा शिकायतें जनप्रतिनिधि, अधिकारियों से कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जानकारी के अनुसार आगासौद से सेमरखेड़ी स्टेशन तक करीब तीन किलोमीटर का रास्ता कच्चा है। इस रास्ते से करीब बारह गांवों के लोगों का आना-जाना है। साथ ही स्टेशन से मुंगावली, अशोकनगर, गुना, बीना, विदिशा, भोपाल में पढ़ाई करने के लिए विद्यार्थी ट्रेन से जाते हैं। ग्रामीण भी रोजगार सहित अन्य काम से आते-जाते हैं। बारिश के मौसम में ग्रामीणों का यहां से पैदल निकलना भी मुश्किल होता है। स्टेशन जाने वाले कर्मचारियों को भी मशक्कत करनी पड़ती है। यदि स्टेशन पर बारिश में एंबुलेंस ले जाने की जरूरत पड़ जाए, तो पहुंचना संभव नहीं है। कई वर्षों से सडक़ की मांग ग्रामीण करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक निर्माण नहीं हुआ है। ग्रामीण कीरत सेन ने बताया कि पिछले कई महीनों से लगातार आवेदन देकर सडक़ बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

किस एजेंसी से बनेगी सड़क यह भी नहीं पता
पहले ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सडक़ बनाने की मांग को लेकर संबंधित विभाग में शिकायत की थीं, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उनके क्षेत्र का कार्य नहीं है। क्योंकि यह डबल कनेक्टिविटी की सड़क है। इसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग में शिकायत की गई है, लेकिन वह भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं। अभी तक यह भी तय नहीं हो पाया है कि कौन सी एजेंसी के माध्यम से यह कार्य होगा।

स्वीकृति मिलने पर होगा कार्य
सड़क के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। स्वीकृति मिलने के बाद तय होगा कि यह कार्य किस एजेंसी को दिया जाएगा।
केके अग्रवाल, उपयंत्री, पीडब्ल्यूडी