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मुंशी प्रेमचंद का साहित्य समाज को जाग्रत करने और दिशा देने वाला है

कॉलेज में मनाई गई जयंती, सृजन पत्रिका का हुआ विमोचन

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Munshi Premchand Jayanti celebrated in college

Munshi Premchand Jayanti celebrated in college

बीना. शासकीय गल्र्स कॉलेज में मुंशी प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. चंदा रत्नाकर ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य समाज को जाग्रत करने और दिशा देने वाला है।
विभागाध्यक्ष संध्या टिकेकर ने कहा कि प्रेमचंद का पूरा लेखन शोषण और अन्याय के विरुद्ध खुला लेखन है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. रश्मि जैन ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य से इस ओर इशारा किया कि प्रदर्शन, प्रियता हमें बड़े-बड़े संकटों में डाल देती है। डॉ. निशा जैन ने कहा कि आज भी प्रेमचंद के पात्र सजीव होकर पाठकों के दिल में बस जाते हैं। छात्रा आरती, हेमलता, रोशनी, शीतल, रुबी, मुस्कान, सोनाली, राखी, पिंकी और नंदिनी मड़ोतिया ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कॉलेज पत्रिका सृजन के 12 वें अंक का विमोचन किया गया। सृजन पत्रिका के विषय में समीक्षा करते हुए प्रो. विनय दुबे ने कहा कि पत्रिका का यह अंक योग और उसके विविध आयामों पर केंद्रित है। इस अवसर पर बलराम सिंह, प्रकाश चंद्र आदि उपस्थित थे।
खिमलासा कॉलेज में मनाई जयंती
शासकीय कॉलेज खिमलासा में भी मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई। प्रभारी प्राचार्य डॉ. सरोज जैन ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने कहानी और उपन्यास के साथ नाटक, निबंध और जीवनी भी लिखीं। कलम का मसीहा मुंशी प्रेमचंद का साहित्य अविस्मरणीय है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. महेन्द्र सिंह यादव ने उनके उपन्यास और कहानियों पर विस्तृत चर्चा की और प्रेमचंद के साहित्य को प्रेम, करुणा, दया का प्रतिबिम्ब बताया। डॉ. त्रिभुवन शुक्ला, डॉ. प्रज्ञा दुबे, डॉ. माधुरी सिंह, रानू नेमा, अनिल विश्वकर्मा, डॉ. रवीन्द्र ठाकुर ने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर रफी अहमद, मो. आबिद खान, नीलेश शर्मा आदि उपस्थित थे।