
Smritias of Muktakash Samosharan temple by keeping golden stone
बीना. आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के 50 वें संयम स्वर्ण महामहोत्सव पर श्रुतधाम तीर्थ परिसर में तीर्थंकर महावीर, मुक्ताकाश समोशरण मंदिर का शिलांयास, भूमिपूजन अनुष्ठान श्रेष्टि द्वय, वृत्ति श्रावकों ने ब्र. संदीप भैया सरल के सान्निध्य, प्रतिष्ठाचार्य नन्हेंभाई शास्त्री के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ पर बड़े बाबा भगवान आदिनाथ का महामस्तकाभिषेक, पूजन संपन्न हुई, इसके बाद भगवान धर्मनाथ के मोक्ष कल्याणक पर बाहर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू चढ़ाया। प्रमुख निर्वाण लाडू महेन्द्र बड़कुल और वृत्ति श्रावकों ने चढ़ाया। दिल्ली से आए श्रावक श्रेष्टि वृत्ति श्रावक अजित, जगदीश, अमित, निर्मल, दीपक एवं शरद जैन सहित नगर के सैकड़ों दान दाताओं ने स्वर्ण शिला रखकर भूमिपूजन एवं शिलान्यास का आयोजन कराया। ब्र. संदीप भैया सरल ने बताया कि संपूर्ण भारत में श्रुतधाम तीर्थ ही एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां पर कभी भी कोई दान राशि एकत्रित करने के लिए बोलियां नहीं लगाई जाती हैं। यहां पर भक्त स्वयं ही संस्था के द्वारा निर्धारित राशि प्रदान कर धर्मलाभ लेते हैं। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सुगंध भौरों को नहीं खोजती, भौरें सुगंध को खोजते हैं। सुगंध से कोई लाभान्वित न हो तो सुगंध को कोई हानि नहीं। हानि है लाभान्वित न होने वाले को। राग-द्वेष से बढ़कर कोई दुर्गंध नहीं। वीतराग से बढ़कर कोई सुगंध नहीं। वीतरागी बनना, सुगंधित बनना है। ख्याति-प्रशंसा के पीछे वह भागते हैं, जिनका जीवन सुगन्धित नहीं। ख्याति प्रशंसा उनके पीछे भागती है, जिनका जीवन सुगंधित है। उन्होंने कहा कि दुर्जनों के संग से बुरी आदत ही पड़ती है। कुसंगति मनुष्य के गुणों को बर्बाद कर देती है। सज्जनों का संग करें, दुर्जनों से दूर रहें। जो व्यक्ति मंदिर बनाने में या मूर्ति स्थापित करने में तनिक भी सहयोग करता हैै तो उसका मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो जाया करता है। शिलान्यास के बाद शाम को भोपाल से आए कवि चंद्रसेन एवं उनके सहयोगी कवियों के द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।इस अवसर पर कपिल मलैया सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे।
श्रुत स्कंध विधान आज
अशोक शकाहार ने बताया कि सोमवार को श्रुत पंचमी पर समवशरण मंदिर के शिलान्यास के दूसरे दिन सुबह 7 बजे नित्य नियम अभिषेक, पूजन होगी इसके उपरांत 8 बजे श्रुतस्कंध विधान, मां जिनवाणी की आरती, 9 बजे संूपर्ण राष्ट्र से आए वृत्तियों के द्वारा विशेष व्याख्यानमाला और शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
Published on:
18 Jun 2018 10:00 am
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