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विभिन्न समाज के लोग अलग-अलग परंपरा से मनाएंगे दीपावली, जैन समाज 1 नवंबर को मनाएगा निर्वाण महोत्सव
सागर. दीपावली का त्योहार उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। घर-घर द्वार पर रंगोली सजेगी और दीपमालाएं सजाई जाएगी। शहर में अलग-अलग परंपराओं के अनुसार विभिन्न समाज के लोग त्योहार को मनाएंगे। 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को त्योहार मनाया जाएगा। त्योहार को मनाने के लिए घरों में लोग तैयारियों में जुटे हैं। जैन समाज दीपावली को निर्वाण महोत्सव के रूप में मनाता है। सिख समाज इसे बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है, वहीं बंगाली समाज के लोग विशेष कालीवाड़ी में महाकाली की पूजन करते हैं।
जैन समाज मनाएगा भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव
जैन समाज 1 नवंबर को 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर का मोक्ष कल्याणक मनाएगा। भगवान महावीर का निर्वाण कार्तिक अमावस्या पर दीपावली के दिन हुआ था। अगले दिन 1 नवंबर को भगवान महावीर की पूजा कर दीप जलाए जाएंगे। शहर के सभी जैन मंदिरों में भगवान का निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। भाग्योदय तीर्थ में निर्यापक मुनि सुधा सागर महाराज के सानिध्य में भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव मनाया जाएगा। लाडू चढ़ाने के बाद घरों में पूजन होगी।
सिख समाज मनाता है दाता बंदी छोड़ दिवस
सिख समाज में दाता बंदी छोड़ दिवस के रूप में दीपावली मनाता है। गुरु सिंघ सभा के अध्यक्ष सतेंदर सिंह होरा ने बताया कि ग्वालियर में जहांगीर की कैद से सिखों के छठवें गुरु हरगोविंद साहब ने 52 हिंदू राजाओं को रिहा कराया था। कार्तिक मास अमावस्या की रात को वे उनके साथ हरमंदिर साहिब अमृतसर पहुंचे थे, उसी के बाद से दिवाली को दाता बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बताया गुरुद्वारे में 31 अक्टूबर की रात में समाज के लोग दीपक जलाने पहुंचेंगे। रात्रि में ज्ञानीजी से अरदास कराते हैं। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर को अखंड पाठ और कीर्तन का आयोजन होगा। कीर्तन के बाद लंगर बरतेगा।
बंगाली समाज करेगा महाकाली की पूजा
बंगाली समाज दीपावली के दिन महाकाली की पूजा करेगा। समाज के नीलरतन पात्रा ने बताया कि गोपालगंज स्थित कालीबाड़ी में रात्रि 11 बजे से विशेष पूजन होगा। 31 अक्टूबर को 108 दीपक यहां जलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बंगाल में नई मूर्ति की पूजा होती है। उन्होंने बताया कि कालीबाड़ी में महाकाली की प्राचीन मूर्ति है। समाज के लोग पूजा-अर्चना करेंगे। उन्होंने बताया कि कुछ घरों में महालक्ष्मी का पूजन होती है। कहीं-कहीं शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी पूजा हो गई है।
मलयाली समाज सजाएगा दीप मालाएं
मलयाली समाज के लोग मकरोनिया स्थित अय्यपा मंदिर में 31 अक्टूबर को दीपावली मनाएंगे। मंदिर दीपक की रोशनी से जगमग होगा। समाज के केसी नायर ने बताया कि तेलगु समाज में नरकासुर का पुतला दहन करने की परंपरा भी है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था।
सिंधी समाज करेगा भगवान झूलेलाल की पूजा
समाज की कांतादेवी ने बताया कि धूमधाम से दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। सिंधी समाज में सिंधु नदी के तट पर दीप जलाने की परंपरा है। इसी को ध्यान में रखकर घरों में भगवान झूलेलाल, गणेश और लक्ष्मी पूजन कर दीपक जलाए जाते हैं। घरों में तरह-तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं।
Updated on:
28 Oct 2024 11:38 am
Published on:
28 Oct 2024 11:34 am
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