
The encroachers did not leave the banks of the historic Lakha Banjara
सागर. शहर में राजस्व और नजूल की भूमियों पर तो रसूखदारों बेजा कब्जा किया ही है लोगों ने सागर की एेतीहासिक लाखा बंजारा झील को भी नहीं छोड़ा। सागर की पहचान झीके किनारों पर अतिक्रमणकारियों ने निर्माण कर अपने अशियाना खड़े कर लिए। पूर्व में एलजीटी के हस्तक्षेप और तालाब के सौदर्यीयकरण को लेकर तत्काली कलेक्टर विकास नरवाल ने तालाब का सीमांकन कराया गया था। इस सीमांकन की कार्रवाई में 50 से ज्यादा अतिक्रमण चिन्हित किए थे। इधर नजूल की भूमि पर बसे सिविल लाईन इलाके में भी बेतहाशा अतिक्रमण है इस पर अभी तक प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया है कार्रवाई की महज चर्चा मात्र है।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सागर झील के किनारों पर हुए अतिक्रमण को लेकर वर्ष 2016 में तत्कालीन कलेक्टर विकास नरवाल ने राजस्व अमले से सीमांकन कराया था। करीब 15 दिन चली कार्रवाई में राजस्व अमले ने करीब 56 अतिक्रमण चिन्हित किए थे। कलेक्टर के स्थानांतरण के साथ ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बताया जा रहा है कि अमले ने परकोटा स्थित गऊ घाट से लेकर चतुर्भज, रिछारिया, चकराघाट, बरिया, भट्टों घाट सहित गंगा मंदिर तक के सभी घाटों का सीमांकन किया गया था। इस मामले में राजस्व व नगर निगम के संयुक्त अमले ने जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें ५६ अतिक्रमण होने का जिक्र था।
यहां बताना जरुरी है कि अधीकांश अतिक्रमण गऊ घाट से लेकर चतुर्भुज घाट पर किया गया है। इसी इलाके में पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण यादव सहित अन्य रसूखदारों के निवास हैं। इसके अलावा आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) का कार्यालय वंदना भी है।
Published on:
28 Dec 2019 09:02 am
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