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माता-पिता का तिरस्कार कर वृद्धाश्रम में छोड़ा, यहां दूसरे निभा रहे रिश्ता, वृद्धों को खिला रहे सुबह-शाम भोजन

पितृ पक्ष में पितरों के पूजन और उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करने की परंपरा है, वहीं वृद्धाश्रम में बढ़ती बुजुर्गों की संख्या बताती है कि जीते जी उनका तिरस्कार उनके बच्चे ही कर रहे हैं।

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सागर

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Reshu Jain

Sep 24, 2024

VRIDH ASHRAM

VRIDH ASHRAM

पितृ पक्ष में वृद्धाआश्रम में भोजन कराने के लिए समाजसेवी करा रहे हैं बुकिंग

सागर. पितृ पक्ष में पितरों के पूजन और उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करने की परंपरा है, वहीं वृद्धाश्रम में बढ़ती बुजुर्गों की संख्या बताती है कि जीते जी उनका तिरस्कार उनके बच्चे ही कर रहे हैं। बच्चों ने मां-बाप को घरों से बाहर निकाल दिया। वर्षों तक माता-पिता ने मजदूरी करके जिन बच्चों को बड़ा किया, आज वही बच्चे दो वक्त की रोटी अपने माता-पिता को नहीं दे रहे हैं। ऐसे पितृ पक्ष में कुछ समाजसेवी भी हैं जो वृद्धाश्रम जाकर दान-पुण्य कर रहे हैं। बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं और उनके साथ भोजन कर उनकी पसंद की चीजें उन्हें उपहार स्वरूप देते हैं।

खाना खिलाने के लिए लोग रहे
नए बस स्टैंड के पास स्थित वृद्धाश्राम में वृद्धों की देखरेख कर रहे देवेंद्र सेन ने बताया कि वृद्धों से मिलने उनके बच्चे नहीं आते है, लेकिन कुछ समाजसेवी हैं जो पितृ पक्ष में आकर यहां वृद्धों को भोजन कराते हैं। 15 दिनों तक पुड़ी, सब्जी, खीर और अन्य व्यंजन वृद्धों को खिलाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों की भी एडवांस बुकिंग चल रही है।

ये वृद्धों की कहानी

45 वर्षों तक की ड्राइविंग
आश्रम में दो वर्षों से रह रहे एलिक जेंडर ने बताया कि उन्होंने 45 वर्षों तक ड्राइविंग की। दिनरात गाड़ी चलाकर बच्चों को बड़ा किया। उन्होंने बताया कि दो बेटे और दोनों सागर से बाहर हैं। एलिक ने बताया कि बच्चे अपनी जिंदगी में खुश हैं, इसलिए उन्होंने वृद्धाश्राम का रास्ता चुन लिया। अब यहीं आश्रम में रहकर जीवन व्यतीत करना है।

पत्नी के साथ आए थे आश्रम
बाबूलाल पटेल ने बताया कि पत्नी के साथ आश्रम में रह रहे थे। वृद्धाश्रम में ही उनकी मृत्यू हो गई। बच्चे अपनी जिंदगी में खुश हैं। वर्षों में कभी मिलने आ जाते हैं। अब हमारी आश्रम में रहकर ही जीवन काट रहे हैं। उन्होंने बताया कि मजदूरी करके बच्चों को बड़ा किया था, लेकिन तीन बेटों में से किसी का सुख हमें नहीं मिला।

बच्चे खुश रहे इसलिए छोड़ दिया घर
वृद्धाआश्रम में रह रही सियारानी पटेल ने बताया कि उनका बेटा है। सियारानी ने बताया कि बेटे की शादी उसका अपना परिवार हो गया। घर में हो रहे झगड़े को शांति करने के लिए वृद्धाआश्रम में आकर हम रहने लगे। सियारानी ने कहा कि पैसों की मोह माया। यहां भगवान का सत्संग करके हमारी जिंदगी अच्छी कट रही है।

अभी पितृ पक्ष में मिल रहा ऐसा भोजन

  • श्राद्ध पक्ष में खीर, इमरती, दो सब्जी, सलाद, रायता, पूरी, रोटी के अलावा हलवा भी बनाया जा रहा है। कई शहरवासी खुद भोजन परोसते हैं। सेहत के लिए सात्विक भोजन और फल भी वितरित किए जा रहे हैं।
  • रोजाना शहरवासियों ने खाना खिलाने के लिए बुकिंग की है।
  • लोग आश्रम में पहुंचक बुजुर्गों से कर रहे अपने सुख-दुख साझा।
  • भोजन के साथ कपड़े, जरूरत का सामान भी दे रहे बुजुर्गों को।
  • वृद्धाश्रम में रह रहे 21 पुुरुष और 19 महिलाएं