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लस्सी में वनस्पति मिलाकर बेच रहे थे दुकानदार, एेसे हुआ खुलासा

खाद्य विभाग ने पिछले महीने लस्सी, दूध, मसाले आदि सामग्री के सैंपल लेकर जांच कराने भोपाल भेजे थे

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The shopkeepers were selling vanaspati the lassi

The shopkeepers were selling vanaspati the lassi

सागर. खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जिले में पिछले महीने लिए गए लस्सी, दूध, मसाले और बेकरी जैसी खाद्य सामग्रियों के सैंपल फेल हो गए हैं। होटल में ग्राहकों को पानी मिला दूध बेचा जा रहा था, जबकि लस्सी में वनस्पति जैसा पदार्थ मिलाकर उसे गाढ़ा किया गया था। विभाग द्वारा सभी सैंपल को भोपाल स्थित लैब में भेजा गया था, जिसकी जांच रिपोर्ट फेल आने के बाद उक्त दुकान संचालकों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी
गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने शाहगढ़ के असाटी मिष्ठान भंडार में बिक रहे दूध पर मिलावट दिखाई देने पर उसका सैंपल लिया था। जांच में दूध में पानी जैसा अमानक पदार्थ पाया गया। शाहगढ़ के महावीर चाट सेंटर में बिक रही लस्सी के सैंपल में वनस्पति जैसा मिल्कफेट व अन्य पदार्थ की मिलावट पाई गई। लस्सी में दही व शक्कर के अलावा अन्य पदार्थ भी मिलाए गए थे जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। मकरोनिया की एसके बेकरी में फ्रूटी व बांदरी की एक किराना दुकान से खड़ा गरम मसाला के सैंपल लिए गए थे, इनकी भी रिपोर्ट फेल आई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कार्रवाई
पिछले सप्ताह देवरी सहित अन्य विकासखंड मुख्यालयों में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने खाद्य सामग्रियों के सैंपल लिए हैं। ग्रामीण क्षेत्र व हाट बाजारों में मिलावट युक्त गुणवत्ताहीन खाद्य सामग्री बेची जाती है, ग्रामीण सस्ते के फेर में इसे खरीदते हैं।
केमिकल मिलाकर सेहत से कर रहे खिलवाड़
गर्मी के सीजन में शीतल पेय में कई तरह के रासायनिक व अमानक पदार्थ मिलाकर बेचे जा रहे हैं। गन्ना का रस, मैंगो शेक, बादाम शेक, लस्सी शेक जैसे शीतल पेय पदार्थों में केमिकल मिलाया जा रहा है।
कहीं नीली तो कहीं सफेद बर्फ बेच रहे
सागर. शहर में नीले रंग की अखाद्य बर्फ के विक्रय को लेकर जारी किए गए निर्देश के बावजूद बाजार में धड़ल्ले से सफेद बर्फ का उपयोग खाद्य सामग्री में किया जा रहा है। बुधवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया। एक फैक्ट्री में नीले रंग की बर्फ मिली, लेकिन उसमें किस रंग का उपयोग हो रहा था, इसका पता नहीं चल पाया। फैक्ट्री का मालिक मौके पर मौजूद नहीं था, जिसके कारण अधिकारी वापस आ गए। मोमिनपुरा में संचालित फैक्ट्री में तो नीले रंग की बर्फ ही नहीं मिली। इसका मालिक भी मौके पर नहीं मिला। बर्फ के धंधे में चल रही धांधली को कम करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकरण ने खाद्य और अखाद्य बर्फ की पहचान करने के लिए नया नियम बनाया है। इसके अंतगर्त अखाद्य बर्फ का रंग १ जून २०१८ से नीला करने के आदेश दिए गए थे। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इस आदेश के आधार पर सभी बर्फ निर्माताओं को निर्देश दिए हैं कि वह अखाद्य बर्फ में नीला रंग बनाकर बेचें, ताकि पहचान हो सके कि बर्फ खाने योग्य है कि नहीं। इस नियम के लागू होने के बाद अधिकारियों को इस दिशा में जांच करनी थी कि सभी कारखाने में बर्फ बनाने के दौरान रंग मिलाया जा रहा है कि नहीं, पर अभी तक शहर में इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
आधा दर्जन से अधिक फैक्ट्री वर्तमान में जिले में आधा दर्जन से अधिक फैक्ट्री संचालित हैं। जनता कोल्ड स्टोरेज भगवानगंज, क्वॉलिटी आइसक्रीम मोतीनगर, रॉयल आइस फैक्ट्री मोमिनपुरा, मकरोनिया और रजाखेड़ी में फैक्ट्रियां हैं। यहां पर प्रतिदिन हजारों किलो बर्फ बनाई जाती है। इनमें २०० से ३०० रुपए प्रति सिल्ली बर्फ बेची जाती है।
बगैर आरओ वाटर के बन रही बर्फ
बर्फ बनाने वाले कारखाना संचालकों को लोगों की सेहत का ध्यान रखते हुए साफ-सुथरे पानी का इस्तेमान करना चाहिए। कारखानों में किस तरह के पानी से बर्फ को बनाया जा रहा है कोई नहीं जानता। जिला खाद्य निरीक्षक पंकज श्रीवास्तव ने बुधवार को निरीक्षण किया तो बर्फ फैक्ट्रियों में मालिक ही नहीं मिले।